शब्द-यात्रा:अदहन
Sunday, 6 December 2015
दर्द औरत का....!
स्त्री सशक्तिकरण का आन्दोलन भटकता ही इसलिए चला गया कि उसमे कई गलत नारे,कई गलत मुहावरे,कई गलत शब्द और कई गलत धारणाएं साजिशन घुसा दी गयीं.....! कहते हैं स्त्री को पुरुषों के कंधे से कन्धा मिलाकर चलना है..ये नही कहते कि पुरुषों को स्त्री के बराबर आने की कोशिश करनी चाहिए...? आखिर स्त्री कब पीछे थी...? पीछे तो पुरुष था...दया में,ममता में,करुणा में,धीरज में,सहिष्णुता मे और जीवन के लिए जरूरी बाकी सभी मूल्यों में.....! गार्गी ने याज्ञवल्क्य जैसे वेदा
चार्य से जब शास्त्रार्थ किया था, तो घूँघट थोड़ी न डाला था.आधा तो महर्षि उसके तेज से ही हार गए थे। मत्स्यगंधा सत्यवती की स्त्री चेतना पराशर की पुरुष चेतना से कमतर तो नही थी। बात को सही दिशा देने की जरूरत है मित्रों.....! जब हम कहते हैं कि औरत ही औरत की सबसे बड़ी दुश्मन है,तो जाने अनजाने एक बड़ा अपराध कर गुजरते हैं,औरत की समग्र लड़ाई को कमजोर कर देते हैं। थोड़ा बारीकी से देखें तो इस मर्दवादी किस्म की बात का अर्थ समझ में आएगा। गुलामों की परम्परा को जरा करीब से देखिये.जमींदारों के घर जो हरकारे,नौकर होते थे, वो उन्ही गांवों,समाजों से होते थे,जिनपर जमीदारों का जुल्म कहर बन के गिरता था..अपने ही समाज और अपने ही लोगों पर ये लोग जमींदारों को खुश करने,उनकी कृपा हासिल करने के लिए उनसे आगे बढ़ के कहर ढाते थे..लेकिन आप ये नही कह सकते कि गाँव वाले ही गाँव वालों के दुश्मन होते थे। असल अपराधी तो वो था,जिसके कृपापात्र बने रहने और अधिक से अधिक लाभ पाने के लिए उसके करीब रहने वाले लोग अपने ही लोगों को सताते थे। एक और उदाहरण से इस बात को ऐसे समझें। जलियांवाला बाग में आन्दोलनकारियों पर गोली चलाने वाले सिपाही हिन्दुस्तानी ही थे.अंग्रेज जनरल ने तो केवल आदेश दिया था...! तो क्या हम ये कह सकते हैं कि तब हिन्दुस्तानी ही हिन्दुस्तानियों के दुश्मन थे....? नही कह सकते.....और ठीक उसी तरह ये भी नही कह सकते कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। ये केवल बड़े गुलाम और छोटे गुलाम वाला मामला है। जो बड़े गुलाम होते हैं,वे साहबान के जरा करीब होते हैं और उनकी नज़रे इनायत पाने के लिए अपने से छोटे गुलामों पर कड़ी नजर रखते हैं, जो बड़े आराम से एक औरत द्वारा दूसरी औरत को सताने तक चला जाता है ..! बात बस इतनी सी है, औरत औरत की दुश्मन है,ये कहने से तो लड़ाई में कमजोरी आती है...!
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