अगर आपकी उँगलियों में हीरे की अंगूठी हैं तो खुश तो बहुत होंगे आप..! और हीरा अगर हार भर हो तो फिर कहना ही क्या.. ! असल में हीरा हमारी हैसियत तो बढ़ा ही देता है.जिस हीरे की चमक हमारा ग्लैमर बढ़ा देती है,जिस हीरे का हमारी ऊँगली या गले में होना हमे इतराना सिखा देता है.क्या आपको पता है कि उस हीरे की इस चमक में आदमी के खून की तासीर कितनी शामिल है..? अफ्रीका के पूर्वी तटीय देशों में जो हीरे की खदानें हैं,वहां एक-एक रत्ती हीरे के टुकड़े के लिए स्थानीय कबीलों,गोरे साम्राज्यवादियों,मल्टीन...ेशनल कम्पनियों और हमारे यहाँ के माओवादियों की तर्ज पर तैयार उपद्रवी शक्तियों के बीच वहशतनाक खूंरेजी चल रही है.प्राकृतिक संसाधन स्थानीय समाजों की धरोहर होते हैं,यह बात अब केवल लिखने पढने की ही रह गयी है.ऐसा हो कहीं नही रहा है.कुछ समय पहले कोल्टान धातु के लिए जारी जंग पर मैंने कुछ जानकारी साझा की थी.उन कबायली देशों के मूल वाशिंदे आदिवासी समाजों को पूरी तरह कब्जे में लेकर हीरों की समानांतर जंग के लिए उनपर जो जुल्म ढाये जाते हैं,वो ताज़ी तस्वीर पेश करते हैं उन फिरंगियों की,जो बड़ी ऐंठ में बताते तो खुद को बहुत बड़ी सभ्यता के वाहक हैं,लेकिन जरा भी कम न तो लालची हैं,न अपराधी.और अपराधी तो वे पूरी मानवता के हैं.इस बेमुरव्वत और कमजर्फ कौम के चरित्र में आज भी कोई परिवर्तन नही है.ये सारा कुछ वहां भी विकास के नाम पर ही हो रहा है.विदेशी कम्पनियां और सरकारें हीरों की लूट के लिए स्थानीय लोगों का शिकार कर रही हैं.उनकी जिंदगियों से खेल रही हैं और सभ्यता के मंचों पर बैठकर गरीबों का उत्थान भी कर रही हैं.तस्वीर कहीं अलग नही है.आम इन्सान चाहे वो कहीं का भी हो,अपना सबकुछ खोकर खत्म हो जाने की स्थिति में है.हॉलीवुड ने इस जलते हुए सवाल को लेकर एक फिल्म बनाई है-ब्लड डायमंड-हमरी न मानो फिलिमिया में देखो.....
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