पहलवान अजित सिंह अखाड़े में हैं.सालों बाद आज उनको अखाड़े में आया देखकर पूरी भाजपा अखाड़े में उतर आई है.एकदम टटके,ताजे हिन्दू ह्रदय सम्राट बने संगीत सोम अखाड़े के आर-पार फैली हुई उनकी टांगों पर थाप दे रहे हैं.कुछ अनन्य देशभक्तों ने पहुँचते ही उस्ताद के हाथ पाँव के बाल नोचने शुरू कर दिए हैं.वैसे अखाड़े की बोली में इस काम को चोंथना कहते हैं,लेकिन जो लोग नोचना समझते होंगे,वे चोंथना अपने आप समझ जायेंगे.समर्...पित भाजपाइयों को उस्ताद की डांट पड़ रही है--ये क्या किया सालों..हम कितना समझाते हैं कि हर चीज की प्रक्रिया होती है.लाउडस्पीकर लगवाने की भी होती ही होगी..डालडा घी वाला टीन का कनस्तर ले आते,उसी से बन जाता भोंपू.ई ट्रेन का पटरी उखाड़ने से भोंपू बजेगा..?आंय..!केजरिवलवा से ट्रेनिंग ले रहे हो तुम लोग..?आंय..!धरना परदरसन हमारे लोग का काम है बुडबक नही तो...?आंय..!ऊ लोग करता है तो हम बोलते हैं कि नही...कि अराजकता फैला रहा है सब...अब ऊ prem prakash भी बोलेगा कि तुम लोग भी अराजकता फैलाता है..अब बताओ,क्या मुंह दिखाएँगे हम...?आंय..!केतना समझाता हूँ अरे डीएम का आँख फोड़ दिया तुमलोग..अरे तोड़ फोड़ करना ही था तो गरदनियाँ उतार लाते..कुछ तो अंतर दिखाई पड़ता देशभक्त लोग में और अराजक लोग में...आंय..!उस्ताद का भाषण चल रहा है और राष्ट्रवादी सेना चोंथ रही है.उठा उठा के दू चार को अखाड़ा की मेड पर पटक मारे हैं अजित सिंह.लेकिन बच्चे लोग आज सब दांव-पेंच सीख के जाने के मूड में हैं.तभी पेड़ पर चिड़िया कुहुंकती है--कुहुंकू...कुहुंकू...कुहुंक ू...!गिरोह के नये बछडो के कान खड़े हो जाते हैं.अजित सिंह पियरी माटी में लथराये हुए हैं.जैसे नये मुल्ले प्याज़ ज़ारा ज्यादा ही खाते हैं,वैसे ही नये नये राष्ट्रवादी थोडा हल्ला-गुल्ला ज्यादा ही मचाने लगते हैं.एक अति-उत्साही राष्ट्रवादी तो अजित सिंह की गर्दन पर ही चढ़ के पेड़ की डाल पकड़ लेता है.वो चिड़िया की गर्दन मरोड़ देना चाहता है.उस्ताद के लिए सम्मान-भाव से भरा हुआ नौसिखिया राष्ट्रवादी चिल्लाता है-हमरे ओस्तदवा को चिढाती है साली चिरई की औलाद..तेरी तो...तभी डाल टूट जाती है.राष्ट्रवादी अखाड़े में चारो खाने चित्त.उस्ताद खउरिहा जाते हैं-हट साले,एक चिरई नही मार सकता तो क्या करेगा..क्या, बोल क्या रही है साली..?तभी चिड़िया एक बार फिर कुहुंकती है--कुहुंकू...कुहुंकू...कुहुंक ू...!!ओ....तो जे बात है..लाल बुझक्कड़ बूझी गये,और न बूझा कोय.गोड में चाकी बान्हि के हरिना भागा होय..!!का उस्ताद..का उस्ताद..का बोली चिरई..उस्ताद चिड़िया के उद्घोष का भाष्य करते हैं.उस गिरोह के अकेले नेता हैं अजित सिंह,जिनपर हनुमान और सरस्वती दोनों की बरोब्बर कृपा रहती है.उस्ताद बोले-चिरई कुश्ती लड़ना चाहती है.बोल रही है-गदा,मुकदर और कसरत...गदा,मुकदर और कसरत..!अर्र्रर्रे बाह...गज्जब...राष्ट्रवादियों में उस्ताद की बात सुनते ही सुनामी आ जाती है-'अब चिरइयो लड़ेगी कुश्ती..हा हा हा..देखा उस्ताद..मोदी जी आये हैं..नया ज़माना लाये हैं..कीरा,बिच्छी,चिरई,चुरुंग सब बरोब्बर..सब बरोब्बर..बाह भई बाह...नारेबाजी के बीच ही देशभक्तों का ध्यान बगल से सब्जी खरीदकर लौट रही भद्र महिला पर जाता है.राष्ट्रवादी लोग महिला लोग का बहुत इज्जत करता है..नयका बछरू मकनाते हुए--हे चाची..हे चाची..तनी सुनिहो तो..ईई चिरइया का बोलत है...?अब चाची के दिमाग में तीस रूपये किलो वाली प्याज़ चढ़ी हुई है.बोलती है-अरे बोहार जाय तोर चिरइया रे..आग लगी सगरी बजरिया में,गोरी गाये मल्हार..!!हे चाची..हे चाची..चिरइया का बोलत है..?चाची ने ध्यान से सुना-कुहुंकू...कुहुंकू...कुहुं कू...!!अरे निबहुरा रे..चिरइया तो बोलत है-लहसुन,पियाज,अदरक...लहसुन,पि याज,अदरक...अरे बाप रे,मोदी जी की सरकार में चाची ने उस्ताद की बात काट दी.मचल कोहराम.गदा,मुकदर और कसरत...कि लहसुन,पियाज,अदरक...चिरइया का बोलत है आखिर..!तबले चिरइया फिर बोली-कुहुंकू...कुहुंकू...कुहुं कू...!!अब उस्ताद ने कपालभाति शुरू कर दी-छोड़ साला चाची को...ध्यान से सुन चिरई का बोलत है..इसी बीच रामनामी ओढ़े कौनो पंडित जी निकल आये कहीं से-का पहलवान जी,हें हें..का हो रहा है अखाड़े में..हें हें..?अरे हो का रहा है यार.कबड्डी खेल रहे हैं अउर का..!!हे पंडित..हे पंडित..तनी ध्यान से सुनो तो चिरइया का बोलत है..!आंय..पंडित जी ने ध्यान लगाया..दूनो कान रोपा और चहक के बोले-एकदम साफ़ तो बोलत है पहलवान.का,अकिलिया घुटने में चली गयी है का..?..कुहुंकू...कुहुंकू...कुह ुंकू...!! अरे,चिरइया बोलत है-राम,लछिमन,दसरथ....राम,लछिमन ,दसरथ..!अजित सिंह चेलों के साथ बउरा गये..लगे कलइया मारने सब एक साथ..फोन लगाओ सालों..prem prakash को फोन लगाओ.अब कोई रस्ता नही.पगलवा दोगे सब के सब तुमलोग..पूछो पूछो..prem prakash से पूछो-चिरइया का बोलत है.
भइया,जलंधर के अखाड़े से बनारस फोन मिलाया गया..हलो..हलो..अजित सिंह हाँ,हमहीं बोल रहे हैं भाई साहब.ई एगो चिरई है..का मालूम का तो बोलत है.तनिक पहिचानिए तो prem prakash जी...आंय..अच्छा अच्छा सुनाइये सुनाइये..कुहुंकू...कुहुंकू...क ुहुंकू...!!अब ईका मतलब लहसुन,पियाज,अदरक...होगा कि राम,लछिमन,दसरथ....होगा कि गदा,मुकदर और कसरत...होगा....का होगा...?ई गदा मुकदर वाला पर हमरा कॉपीराइट है वइसे....हा हा हा..बनारस से फोन पर ठहाका लगा तो राष्ट्रवादी चौकन्ने हो गये..इतनी हिम्मत ओस्ताद जी..सरकार मोदी जी की..अउर हंसिहें prem prakash जी...?आंय..!......फोन पर आवाज आई-अरे अजित भइया,चिरई तो साफे साफ़ बोलत है-अपना अपना मतलब...अपना अपना मतलब...मकनाते हुए नये बछरू गच्चा खा जाते हैं..उस्ताद को पसीना आ जाता है.चिरइया उड़ जाती है.सारे राष्ट्रवादी मिल के एक साथ मोदी जी को फोन लगा रहे हैं.उस्ताद की आवाज सबसे तेज है-देखौ भइया मोडी जी..ई prem prakash को तो देश निकाला दे दो हाँ,समझे कि नाही...!ओट तुहें हम दिए थे.ऊ prem prakash नही दिया था..अब हमारे सबके रहते चिरई चुरुंग का बोली भाषा ऊ बूझेगा...?आंय..
भइया,जलंधर के अखाड़े से बनारस फोन मिलाया गया..हलो..हलो..अजित सिंह हाँ,हमहीं बोल रहे हैं भाई साहब.ई एगो चिरई है..का मालूम का तो बोलत है.तनिक पहिचानिए तो prem prakash जी...आंय..अच्छा अच्छा सुनाइये सुनाइये..कुहुंकू...कुहुंकू...क
बढ़िया कटाक्ष है देसी मिक्सअप में, लेकिन घामड़ लोग के समझ में आने से रही...
ReplyDeleteहुकुमत-ए-हिन्दोस्तां और राष्टव्द का मजमा कुछ कम है, अजित बाबू चमके फिर रहे हैं।
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