क्लास के सबसे 'पावरफुल' बच्चे ने हेड मास्टर का ट्रांसफर करवा दिया.उसके पापा अम्बानी की कोट कलफ करने का काम करते थे.उन्होंने ही बताया था कि रिलायंस वाले ने अब ''अच्छे दिन'' बनाने वाली फैक्ट्री डाली है.'पावरफुल' बच्चे ने खूब हल्ला मचाया.स्कूल में अच्छे दिन लाने हों,तो ये हेड मास्टर बदलना पड़ेगा.अच्छे दिन बनाने वाली देश की एकमात्र कम्पनी रिलायंस ने हेड मास्टर सप्लाई करने का नया काम भी शुरू कर दिया है.....नया हेडमास्टर आया तो उसने 'पावरफुल' बच्चे के साथ पहली मीटिंग की.सारा फीडबैक लेकर उसने घोषणा की कि अच्छे दिन मंगाने हों तो सबसे पहले फीस बढानी पड़ेगी.गरीब बच्चे और उनके अभिभावक परेशान हो उठे..ये क्या..?फीस क्यों बढ़ाएंगे सरकार..?वो तो पहले से ही बहुत ज्यादा है..हेडमास्टर ने समझाया-वो फीस हमारी नही थी.वो तो दूसरी कम्पनी वालों ने लगाई थी.और सब बटोर के लेते भी गये.अब हेडमास्टर जिस कम्पनी से आया है,फीस भी वही कम्पनी लगाएगी..इस सारी कारीगरी को समझ रहे लोगों ने विरोध किया तो 'पावरफुल' बच्चे के घर वालों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया--ये लोग स्कूलद्रोही हैं..और इनके पास धीरज भी नही है,सो इन लोगों को फांसी पर लटका दो..और इस हो हल्ले के बीच बढ़ी हुई फीस लागू कर दी गयी.गरीब बच्चों के लिए बुरे दिन आ गये.उनके लिए आगे पढना मुश्किल हो गया.वे धीरे धीरे स्कूल छोडकर जाने लगे तो हेडमास्टर ने उन्हें डपटा--अबे,अच्छे दिन की कैटिल क्लास वाली औलादों..मिड डे मील कौन खायेगा..?जब सभी गरीब बच्चे चले गये तो 'पावरफुल' बच्चे ने शैम्पेन की बोतल निकाली और अम्बानी कम्पनी के हेडमास्टर ने जोर से कहकहा लगाया-चीयर्स..चीयर्स..
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