लडकियाँ लडकों को पीट रही हैं सरेराह ... जैसा कि युग-युग से होता ही आ रहा है...,समाज इस अति सम्वेदनशील मसले पर भी दो फाड़ नजर आ रहा है.अपने वजूद पर सदियों सदियों से हो रहे शारीरिक और मानसिक आघातों को सहते-सहते अचानक आक्रामक हो उठी लड़कियों के पक्ष और विपक्ष में विचारधाराएँ सन्नद्ध हो रही हैं.दोनों ही विचारधाराएँ अपने देश और समाज का उत्थान चाहती हैं और दोनों ने ही ऐसे और भी कई मुद्दों पर देश व समाज को अपने-अपने पाले में बाँट रखा है.लड़कियों ने ठीक किया....लड़कियों ने ठीक नही किया........हम यह तय करके मानेंगे,हम गौरवशाली समाज हैं.........!
जी हाँ,लड़कियां गलत भी हो सकती हैं,बिलकुल वैसे ही जैसे उत्तर प्रदेश में हरिजन बनाम सवर्ण वाले क़ानून के दायरे में आये लोग कई बार इस तरह के आरोप लेकर खड़े हुए कि इस क़ानून का दुरूपयोग हो रहा है.मै तब भी कहा करता था..आज इस विषय में फिर कहता हूँ.वो चाहे दलित रहे हों या महिलायें..सदा सदा से जो उनका शोषण किया जाता रहा है,वो किस क़ानून का सदुपयोग कर रहे थे हम सवर्ण और हम मर्द लोग.....? कुत्तों को भारी गर्मियों में जीभ लपलपाते हुए तो सभी ने देखा ही होगा..हम रोज देखते हैं लड़कियों की टोह में लगे,उनका पीछा करते,उन्हें बोली-टिबोली बोलते और प्राण और अंतरात्मा का जोर लगाकर लड़कियों को गंदी नजरों से घूरते हुए,बिलकुल वैसे ही जीभ लपलपाते हुए कुछ लड़कों को.
क्या बुरा है सदियों के अन्याय और असहनीय अपमान के बदले अगर कहीं कोई निर्दोष भी पिट गया तो..?? पीढ़ियों-पीढ़ियों से जिन दलितों और जिन महिलाओं को क्रीतदास और क्रीतदासी बनाकर रखा हमने,आज उन्हें जरा-जरा सा खुलता हुआ आसमान अगर खुद के सांस लेने के लिए दिखने लगा है तो इतनी हायतोबा क्यों मचाये हुए हैं हम..?? अगर कोई निर्दोष लड़का पिट गया है तो मुझे उसके साथ पूरी सहानुभूति है,लेकिन थोक के थोक जिन महिलाओं का बलात्कार हो रहा है.जो सड़कों पर छेड़ी जा रही हैं,जिनकी जिनगी गर्क कर देते हैं हम,वो निर्दोष नही होती है क्या..?? बाप या भाई के साथ चलती हुई लड़कियों पर जो कटाक्ष होते हैं और जो वेद-वाक्य बोले जाते हैं,वो सब सुनकर उस पिता,उस भाई या उस लडकी पर क्या गुजरती है,ये सोचना किस समाज की जिम्मेदारी है..?? समाज अपना प्रक्षालन सम्पूर्णता में कब करेगा..??
गजब करते हो भारतवर्ष..! दो चार बच्चे निर्दोष पिट गये तो हिमालय गलने लगा..हजारों,लाखों बच्चियां,युवतियां,वृद्धाएँ जो नीच कामान्धता का शिकार होकर जीवन ही खो बैठीं,उनके नाम पर तुम्हारे ग्लेशियरों में इतनी गलन तो नही दिखी कभी..!शोषण के औचित्य-अनौचित्य के प्रश्न पर विभक्त समाज को अपना एक सम्मिलित उद्देश्य तो तय करना पड़ेगा..अभीष्ट क्या है आपका..? लड़कियों को सुरक्षित घर,सुरक्षित सड़क और सरक्षित कार्य-क्षेत्र मिलना चाहिए कि नही..?? आप तय करते रहिये.लड़कियों ने रास्ता खोज लिया है..और बिलकुल ठीक खोज लिया है..! जो लड़के निर्दोष साबित हुए,उनसे माफ़ी मांग लेंगी लड़कियां..आखिर बलात्कार की शिकार लड़कियों की शादियाँ उन्ही बलात्कारियों के साथ करवा के आप न्याय नही करते आ रहे हैं क्या....??
लड़कियां छिछोरे कामांध लडकों को पीट रही हैं और तबियत से पीट रही हैं.बड़े ढंग से पीट रही हैं भई..और हर जगह पीट रही हैं..एक जलजला सा उट्ठा है और हरमों के अय्याश कुलबुलाने लगे हैं नालियों में पड़े कीड़ों की मानिंद.पीटने वाली लडकियों को गुंडी बताया जा रहा है और बदमाश भी.खौफ ये भी है कि ये विडियो भी बना लेती हैं.सुनो लड़कियों....!!
देख रही हो न ये तूफ़ान..! जीवन को उसकी डिमांड के मुताबिक़ अपने अंदाज़ में जीने का हक तुम्हारा पहला है क्योंकि तुम जीवन देती हो.जबकि जीवन को नियंत्रित करने के ह...थियार आज उन हाथों में हैं,जो जीवन दे नही सकते,लेकिन लेने में लगे हुए हैं.सुरक्षा का प्रश्न तो तुम्हारा बुनियादी हक है और तुम्हारी सुरक्षा के नाम पर जारी ये बहसें तुम्हे तुम्हारी बुनियाद में ही उलझाए रखने के कुचक्र हैं.ये तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारे आंगन में तुम्ही से लड़ने की साजिशें हैं.तुम्हे इन बहसों में भागीदारी से इनकार कर देना है.तुम्हे इनके घर में घेरना पड़ेगा इनको....
परसों शाम के सात ही बजे थे,जब वो राजघाट पुल से नीचे उतर रही थी बिंदास.उसके खुले हुए बाल कुछ लोगों को मदहोश करने लगे.वो आगे बढी तो वे पीछे से आये.बाइक धीमी कर ली और साथ साथ चलने लगे...खुले बालों में बहुत प्यारी लग रही हो..सुनकर उसने चाल तेज कर ली.लेकिन नाली के कीड़े बाइक से थे..जल्दी ही नालायकों ने आखिरी बात कह दी और बाइक तेज करके भागे,इसने दौड़ा लिया था.पकड़ में आते आते छूट गया पिछला जोड़ीदार..लेकिन ये बनारस है.सामने से आ गये नन्दिराज..भूत भगवान का सांड.जरा सा घिरे बाइक सवार..इतने में अश्लील शब्दों से पागल हुई चंडी करीब आ पहुंची थी और इस बार कोई गलती नही हुई.खींच लिया पीछे वाले को जमीन पर..और अगला पूरे वेग में लहराकर गिरा बाइक समेत.दोनों के शर्ट फाड़ दिए और ईंटों से बाइक की टंकी तोड़ दी.भीड़ यहाँ भी इकठ्ठा थी.वो दोनों को पीट रही थी.दोनों चाहते तो उसको भी पीट सकते थे.जैसा सुना मैंने दिखने में दोनों ही मजबूत थे,पर कैसे पीटते.आत्मबल कहाँ से लाते..चोरकट लोग बड़े कमजोर होते हैं अंदर से..चोर के लिए धिधोर बहुत होता है.दोनों गिडगिडाने लगे क्योंकि बगल की चेक पोस्ट से पुलिस वाले आ गये थे.पूरा मामला समझकर लड़की को बकअप किया.तमाशबीनों की लानत मलामत की,लडकी को पुलिस सिक्योरिटी में घर तक पहुंचाया और शरीफजादों को थाने ले गये..अगले दिन अखबारों में खबर थी....छः फुट ऊंची लड़की ने शोहदों को सुंघाई जमीन....मुझे अच्छी तरह मालुम है कि यहाँ भी अगर संस्कृति-रक्षकों की सरकार होती तो इस लड़की के भी कई ऐतिहासिक विडियोज अबतक सामने आ चुके होते.उसके गुंडी होने का कुर्सीनामा मार्केट में बिक रहा होता और सदियों की काई लगी जबानों पर काइयां किस्म की चटखारें होतीं.
सुनो लड़कियों..! अपना रास्ता खुद चुनो,अगर तुम सुरक्षित हो गयी तो बहुतेरे असुरक्षित हो जायेंगे,ये जानो और मानो कि ये ढकोसलें हैं.कोई कुछ नही देगा तुम्हे..न सुरक्षा,न इज्जत,न जिन्दगी,न सुकून....जो पाना है,खुद से पाना है....कर बहियां बल आपनी....छांड बिरानी आस......बकअप..तुममे से हरेक को छः फुट ऊंची लडकी बनना है..
क्या बुरा है सदियों के अन्याय और असहनीय अपमान के बदले अगर कहीं कोई निर्दोष भी पिट गया तो..?? पीढ़ियों-पीढ़ियों से जिन दलितों और जिन महिलाओं को क्रीतदास और क्रीतदासी बनाकर रखा हमने,आज उन्हें जरा-जरा सा खुलता हुआ आसमान अगर खुद के सांस लेने के लिए दिखने लगा है तो इतनी हायतोबा क्यों मचाये हुए हैं हम..?? अगर कोई निर्दोष लड़का पिट गया है तो मुझे उसके साथ पूरी सहानुभूति है,लेकिन थोक के थोक जिन महिलाओं का बलात्कार हो रहा है.जो सड़कों पर छेड़ी जा रही हैं,जिनकी जिनगी गर्क कर देते हैं हम,वो निर्दोष नही होती है क्या..?? बाप या भाई के साथ चलती हुई लड़कियों पर जो कटाक्ष होते हैं और जो वेद-वाक्य बोले जाते हैं,वो सब सुनकर उस पिता,उस भाई या उस लडकी पर क्या गुजरती है,ये सोचना किस समाज की जिम्मेदारी है..?? समाज अपना प्रक्षालन सम्पूर्णता में कब करेगा..??
गजब करते हो भारतवर्ष..! दो चार बच्चे निर्दोष पिट गये तो हिमालय गलने लगा..हजारों,लाखों बच्चियां,युवतियां,वृद्धाएँ जो नीच कामान्धता का शिकार होकर जीवन ही खो बैठीं,उनके नाम पर तुम्हारे ग्लेशियरों में इतनी गलन तो नही दिखी कभी..!शोषण के औचित्य-अनौचित्य के प्रश्न पर विभक्त समाज को अपना एक सम्मिलित उद्देश्य तो तय करना पड़ेगा..अभीष्ट क्या है आपका..? लड़कियों को सुरक्षित घर,सुरक्षित सड़क और सरक्षित कार्य-क्षेत्र मिलना चाहिए कि नही..?? आप तय करते रहिये.लड़कियों ने रास्ता खोज लिया है..और बिलकुल ठीक खोज लिया है..! जो लड़के निर्दोष साबित हुए,उनसे माफ़ी मांग लेंगी लड़कियां..आखिर बलात्कार की शिकार लड़कियों की शादियाँ उन्ही बलात्कारियों के साथ करवा के आप न्याय नही करते आ रहे हैं क्या....??
लड़कियां छिछोरे कामांध लडकों को पीट रही हैं और तबियत से पीट रही हैं.बड़े ढंग से पीट रही हैं भई..और हर जगह पीट रही हैं..एक जलजला सा उट्ठा है और हरमों के अय्याश कुलबुलाने लगे हैं नालियों में पड़े कीड़ों की मानिंद.पीटने वाली लडकियों को गुंडी बताया जा रहा है और बदमाश भी.खौफ ये भी है कि ये विडियो भी बना लेती हैं.सुनो लड़कियों....!!
देख रही हो न ये तूफ़ान..! जीवन को उसकी डिमांड के मुताबिक़ अपने अंदाज़ में जीने का हक तुम्हारा पहला है क्योंकि तुम जीवन देती हो.जबकि जीवन को नियंत्रित करने के ह...थियार आज उन हाथों में हैं,जो जीवन दे नही सकते,लेकिन लेने में लगे हुए हैं.सुरक्षा का प्रश्न तो तुम्हारा बुनियादी हक है और तुम्हारी सुरक्षा के नाम पर जारी ये बहसें तुम्हे तुम्हारी बुनियाद में ही उलझाए रखने के कुचक्र हैं.ये तुम्हारे घर में घुसकर तुम्हारे आंगन में तुम्ही से लड़ने की साजिशें हैं.तुम्हे इन बहसों में भागीदारी से इनकार कर देना है.तुम्हे इनके घर में घेरना पड़ेगा इनको....
परसों शाम के सात ही बजे थे,जब वो राजघाट पुल से नीचे उतर रही थी बिंदास.उसके खुले हुए बाल कुछ लोगों को मदहोश करने लगे.वो आगे बढी तो वे पीछे से आये.बाइक धीमी कर ली और साथ साथ चलने लगे...खुले बालों में बहुत प्यारी लग रही हो..सुनकर उसने चाल तेज कर ली.लेकिन नाली के कीड़े बाइक से थे..जल्दी ही नालायकों ने आखिरी बात कह दी और बाइक तेज करके भागे,इसने दौड़ा लिया था.पकड़ में आते आते छूट गया पिछला जोड़ीदार..लेकिन ये बनारस है.सामने से आ गये नन्दिराज..भूत भगवान का सांड.जरा सा घिरे बाइक सवार..इतने में अश्लील शब्दों से पागल हुई चंडी करीब आ पहुंची थी और इस बार कोई गलती नही हुई.खींच लिया पीछे वाले को जमीन पर..और अगला पूरे वेग में लहराकर गिरा बाइक समेत.दोनों के शर्ट फाड़ दिए और ईंटों से बाइक की टंकी तोड़ दी.भीड़ यहाँ भी इकठ्ठा थी.वो दोनों को पीट रही थी.दोनों चाहते तो उसको भी पीट सकते थे.जैसा सुना मैंने दिखने में दोनों ही मजबूत थे,पर कैसे पीटते.आत्मबल कहाँ से लाते..चोरकट लोग बड़े कमजोर होते हैं अंदर से..चोर के लिए धिधोर बहुत होता है.दोनों गिडगिडाने लगे क्योंकि बगल की चेक पोस्ट से पुलिस वाले आ गये थे.पूरा मामला समझकर लड़की को बकअप किया.तमाशबीनों की लानत मलामत की,लडकी को पुलिस सिक्योरिटी में घर तक पहुंचाया और शरीफजादों को थाने ले गये..अगले दिन अखबारों में खबर थी....छः फुट ऊंची लड़की ने शोहदों को सुंघाई जमीन....मुझे अच्छी तरह मालुम है कि यहाँ भी अगर संस्कृति-रक्षकों की सरकार होती तो इस लड़की के भी कई ऐतिहासिक विडियोज अबतक सामने आ चुके होते.उसके गुंडी होने का कुर्सीनामा मार्केट में बिक रहा होता और सदियों की काई लगी जबानों पर काइयां किस्म की चटखारें होतीं.
सुनो लड़कियों..! अपना रास्ता खुद चुनो,अगर तुम सुरक्षित हो गयी तो बहुतेरे असुरक्षित हो जायेंगे,ये जानो और मानो कि ये ढकोसलें हैं.कोई कुछ नही देगा तुम्हे..न सुरक्षा,न इज्जत,न जिन्दगी,न सुकून....जो पाना है,खुद से पाना है....कर बहियां बल आपनी....छांड बिरानी आस......बकअप..तुममे से हरेक को छः फुट ऊंची लडकी बनना है..
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