Thursday, 31 December 2015

ठोंको ताली

किसी भीड़ भरी सड़क से जा रहे हों और लोगों की गुत्थमगुत्था मे कोई छोटी से भी दरेर लग जाये तो सामने वाले की तरफ तरेर के देखना हममे से अधिकतर का संस्कार है। माहौल अगर सड़क पर मर्दानगी दिखाने का बन रहा हो तो सावन से भादों कमजोर क्यो रहे...! सामने वाला भी उसी मुद्रा मे मिलता है। अपने बनारस मे तो दोनों दोनों से एक ही बात पूछते हैं--देखात ना हौ का...! smile emoticon फिर थोड़ी देर झौं झौं होती है...। खूब जबानी जमाखर्च होता है। smile emoticon लेत्तेरी की...देत्तेरी की...धत्तेरे की...होत्तेरी की...! आमतौर पर यही होता है। अधिकतर यही होता है। करीब करीब अब ये हमारा राष्ट्रीय संस्कार भी है। लेकिन इस आम हेकड़ीबाजी से अलग कभी कभी ऐसा नही भी होता है। हो सकता है जब आप तरेर के सामने देखने की तैयारी कर रहे हों तभी उधर से मिसरी जैसा अचानक सॉरी सर सुनाई पड़ जाय। मैंने खयाल किया है जाम ट्रैफिक मे मिसरी घुलाने वाली ये आवाजें अक्सर विद्यार्थियों की होती हैं। वही कूल ड्यूड्स ..... smile emoticon अपनी ही धुन मे। भागते पराते smile emoticon आदत मे ढाले बैठे हों जैसे कि कही किसी को दुखी कर दिया हो तो सॉरी कहके और किसी को खुशी दे दी हो तो थैंक यू बोल के आगे बढ़ जाना है। रुकना नही है..वो भी इसलिए कि तरेरना है किसी को। smile emoticon
उस चीखते चिल्लाते हुए माहौल मे भी इन लड़कों का अपना सद्व्यवहार और विवेक बनाए रखना सुखद लगता है। लेकिन इससे भी ज्यादा सुखद तब लगता है जब दो लड़कियों को एक दूसरे से भिड़ते हुए देखिये। ड्यूड्स से दो कदम आगे इन ड्यूडेसेज को जब भी कभी इस तरह देखा है, एक दूसरे को उठाते संभालते और हांफती हुई हर सांस मे दोनों ही को सॉरी बोलते देखा है। एक बार तो देखा एक की साइकिल आगे चल रही लगभग उसी की उम्र की एक ड्यूडेस से जा भिड़ी। smile emoticon उसने घूम के उसे देखा पर शायद वो ये सोचकर घूमी कि पूरा घूमते घूमते भर मे तीन चार बार सॉरी बोल देना है। एकदूसरे को देखा, दोनों मुस्कुराईं। फिर उसने उसकी साइकिल पकड़ ली। उसने उसका पैर साफ कर दिया। दोनों मे से कोई कुछ नही बोली। बस मुस्कुरा के गुंडई कर ली दोनों ने। smile emoticon इन ड्यूड्स और ड्यूडेसेज के लिए नवजोत सिद्धू यहाँ होते तो कहते- ठोंको ताली..... smile emoticon smile emoticon smile emoticon

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