Saturday, 19 March 2016

मधुप आज कलि-कुंज बिहारी....।

मधुप आज कलि-कुंज बिहारी....।
आम्र मंजरी बौराई है,
तरु पर छाई तरुणाई है।
बरस चुकी शबनम, 
सूरज की हरस रही अब अरुणाई है।
बीत गयी जब स्याह अमावस,
तब आई पूनम की बारी। मधुप आज कलि-कुंज बिहारी....।
मधुवन मे पड़ गया हिंडोला,
पीपर-पात सरिस मन डोला।
काँटों और धूल से लथ-पथ,
भँवरे ने कलि का मुख खोला।
बोला अलि कलि की सखियों से,
प्रणय-कलह की हो तैयारी। मधुप आज कलि-कुंज बिहारी....।
अटी पटी तारावलियाँ हैं,
धूल भरी पंखुरी कलियाँ हैं।
कांटे राह रोक लेते हैं,
बंधन मे कुंजर,गलियाँ हैं।
रस, पराग, सौरभ, मादकता
सोख रहा अलि बारी-बारी। मधुप आज कलि-कुंज बिहारी....।

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