Sunday, 3 August 2014

वो बूढ़ा

उनकी तरफ देखता कौन है...कोई नही...अरे मैली कुचैली आधी टांग की काली पड़ गयी धोती और लगभग अस्सी साला लुजलुज शरीर पर झूलती वैसी ही गंजी में घुसा फुटपाथ पर उंकडू बैठा मजूर भी कोई देखने की चीज है..?दिहाड़ी के बाद मंडी से लौटा है...एक अदद बीड़ी का साथ है,सुस्ता रहा है...लोग दूकान पर भिड़े हैं,किसी को कुछ लेना है किसी को कुछ..बगल में वेल्डर की दुकान है.वेल्डर चूल्हा और स्टोव भी बनाता है...कम लोगों को मालूम ह...ै कि गैस भी बेचता है...उसी के चिल्लाने का शोर सुनकर ध्यान उधर गया.....न देब.....न देब.....न देब....आज उधार न देब.ग्राहक परेशान है..अरे भाई,आज खाना नही बनेगा हमारे घर...परसों दे देंगे,लेकिन आज काम चला दो,अब इत्ती रात को हम क्या करें...!!..तो हमसे पांच सौ रूपया ले ला....जा के कहीं से भरा ला गैस,लेकिन उधार न देब...कहीं मिलबे ना करी...जिन्दगी ख़राब हो गयल हमार...एजेंसी वाला अलग से..बाट माप वाला अलग से..पुलिस वाला अलग से...सबकर रुआब सहे के हमहीं हई...?ऊ एजेंसी वाला सरवा एक एक सिलिंडर पर आठ-आठ सौ कमात हौ..ओके पूछे वाला केहू नाही..हम ब्लैक खरीद के तब न ब्लैक बेचीला....बीस गरीबन के घर का चूल्हा हम जराईला...अब न करब धन्धवे..एसे बढ़िया हौ आत्महत्या कर लेई...हमने बड़ी शराफत से टोका...लेकिन यार,धंधा तो गलत ही करते हो आखिर,तो हफ्ता लेने तो आयेंगे ही सब.इसीलिए तो भ्रष्टाचार,....अभी इतना ही बोल पाए थे कि....बा रजा,बाह....तोसे ढेर अनुभव हौ हमे जिंदगी क...जे छः हजार नाही खर्चा कर सकत,ओकर पांच सौ में चूल्हा जरावे क शौक पूरा करीला हम....ओकर कुछ नाही..हम गलत करत हई...ऊ सार सही करत हौ जे हम्मे ब्लैक बेचत हौ...जेके चालीस हजार मिलत हौ फिर भी चालीस रूपया बदे कुक्कुर नियर दुआरी पर खड़ा रहे,ऊ सब सही हउअन...?..बा रजा...जात हई मोदी के चिट्ठी लिखे कि हमार जान मार दे..नाही त गैस क लाइसेंस हम्मे दे..ई एजेंसी वाला लूट मचउले हउअन..ई बात बेचारा मोदिया के पता ना हौ...एसे हम चिट्ठी लिखब.बहुत सही आदमी हौ मोदिया...ओके पता चल जाई एजेंसी वालन क पोल त समझा एजेंसी बंद..ऊ अब आ गयल हौ न...देखा गुरु अब गैस क दाम भी कम हो जाई...अबहिन त आयल हौ न....चिट्ठी हमार पहुंचे दा दिल्ली...एक बेरी तहलका मची...ओट देले हई....देख लिहा दस दिन के भित्तर गैस एकदम सस्ता हो के बिके लगी दुकान दुकान ...एजेंसी वालन क राज ख़तम...हम चिट्ठी लिखब कि हम्मे लाइसेंस दे दे..नाही त फांसी क हुकुम दे दे सारे...अब बोलता है,वो जिसकी बीडी अब ख़त्म हो गयी है...हुंह....रेपवा वालन के मोलायम फान्सिये ना देत हउअन,चोरवन के फांसी का दीहें...?..मेरा ध्यान उंकडू बैठे बूढ़े मजूर की बात पर गया....रेपवा...!मैंने फिर सुनना चाहा..क्या कहता है वरिष्ठ नागरिक...?हाँ,भइया...रेपवा में अब कहाँ फांसी होत हौ,,मोलायम हटा देहलन..मोदियो कुछ ना करी...लूटी,खायी,मजा लेई पांच बरीस...

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