ये चित्र जब सामने आया तो मुझे अपनी कमली की बहुत याद आई.कमली धनुआ की मेहरारू है.मेरे गाँव की मुसहर बस्ती का धनुआ.गाजीपुर और आसपास के जिलों से होते हुए सुदूर बिहार तक घूम आइये मुसहरों की छिटपुट आबादी जहाँ तहां मिलती जायेगी.बिहार में तो मुसहरी नाम से एक पूरा प्रखंड ही है,जहाँ लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्पूर्ण क्रान्ति के दिनों में जाकर आसन ही जमाकर बैठ गये थे और आन्दोलन के प्रभावी सूत्र भी ग्रहण किये थे.बहुत दिनों तक वहीँ से आन्दोलन को संचालित भी करते रहे.ये तो खैर हमारा अतीत है,लेकिन वर्तमान भी उस इतिहास से अभी बहुत अलग नही है.......तो दोस्तों,हम अपनी मुसहर बस्तियों में अक्सर तब जाते हैं जब खेती का सीजन होता है और थोक में मजूरों की जरूरत पड़ती है.उन दिनों हम खेती के प्रयोगों में बड़े मनोयोग से लगे हुए थे.धान रोपने के सीजन में अपनी मुसहर बस्ती की आज भी रौनक हो जाती है.शाम को मालिक खेतिहर लोग इन बस्तियों में जा के कह आते हैं-कल मेरा धान रोपना है रे... केतना आदमी लगिहें ठाकुर... अरे बीस,पचीस चले आना,ज्यादा नही... कल की मजूरी पक्की साहब.अब मुसहरिया में मेला लगा है.सब खुश हैं.होता ये है कि अगले दिन अलस्सुबह मालिक लोग अपने खेत तैयार करने में लग जाते हैं और मुसहर अपनी मुसहरिनों के साथ बेहन के खेत में जुट जाते हैं..नौ,दस बजते-बजते बेहन उखाड़ लिया और छोटी-छोटी आंटी बनाकर जिस खेत में रोपना है,उसमे फेंक के घर चले.अब मुसहर पुरुष बीड़ी,गांजे की चिलम भरेंगे और मुसहरिनें खाना बनाएंगी.खाना खाने खिलाने के बाद वे नहायेंगी,नई साड़ियाँ पहनेंगी,बालों में खूब सारा नीम का तेल चुपडेंगी,बाल संवारकर लाल पीले फीते बांधेंगी.बड़ी- बड़ी बिंदियाँ लगायेंगी,खूब लम्बा और खूब गाढ़ा सिन्दूर लगाएंगी,पैर रंगेंगी और एक,दो बजते-बजते रोपनी के गीत छेडती एक लाइन से खेत की ओर चलेंगी कि जैसे मेला लगा हो कहीं सच में..मेरे खेत पर तो मेला ही लगता था.मेरे यहाँ सब आती थीं.एक भी न छूटे.क्या फर्क पड़ता है बीस मजूर मांगे थे और तीस चले आये.मेड पर पहुँच के अपनी साड़ियों को आगे से मोडकर पीछे खोंस लेंगी.इस क्रिया को वे कछाड़ मारना कहती हैं.अब घुसेंगी वो कीचड और पानी से भरे खेत में.आंटियां खोलते,दो दो दाने बीज रोपते वे झुण्ड में पीछे की ओर चलती जायेंगी.हरे हरे धान की परतें खेत में बिछती जायेंगी.इस बीच अगर खेतिहर दिख जाए तो गीत गाना और धान रोपना छोडकर उनकी होरी शुरू हो जाती है.गीली मिटटी लिए दौड़ा लेती हैं दूरतक,आप चाहे लाट साहब ही क्यों न हों.भला चाहते हैं तो कुछ दे दिला के मामला रफा दफा कीजिये वरना नक्शा बिगड़वाइए और घर जा के सुनिए.
खैर,मैंने तो एक-एक के नाम याद कर डाले थे.आमतौर पर हमारी तरफ लोग औरतों को उनके पुरुषों के नाम से बुलाते.जैसे-धनुआ की औरत धनुआ बो...बाबूलाल की औरत बाबूलाल बो...मेरे लिए थोडा मुश्किल था,सो मैने नाम रट लिये थे सभी के----कमली,जसोदिया,परभउती,
देश को आज़ाद हुए 67 साल हो गये लेकिन लाखों लाख मुसहरों के पास एक बित्ता भी जमीन कही नही है.नसबंदी के दिनों में जिन मुसहर महिलाओं ने नसबंदी या नलबंदी जो भी कहें,करवाई,उनके नाम दो बिस्सा बंजर जमीन पट्टा हुई.ऐसे उदाहरण भी गिनती के हैं.इनकी आजीविका मालिकों के खेतों में मजूरी या फिर सूअर पालना है.हाड कंपाने वाली ठंढ में भी इनके जन्मतुए बच्चे तक अपनी सुअरें लेकर नंगे बदन,नंगे पाँव सिवानों में निकल जाते हैं और खाली खेतों में चूहे,केकड़े मारकर खाते हैं.आज भी कहीं कोई पढ़ा लिखा मुसहर मिल जाय तो आश्चर्य ही होगा मुझे.हैं दो चार,लेकिन ये देशभर का आंकड़ा है.किसी एक जिले में नही मिलेंगे.उस दिन जब धनुआ अपनी कमली को डॉ के पास लिए जा रहा था तो जो दृश्य बना था,आज ये तस्वीर देखी तो वो जिन्दा हो गया जेहन में..जिन्दगी कभी किसी को पूरा नही देती.जिन्हें लगता है कि हमने तो सबकुछ पा लिया-ये दौलत भी,वो शोहरत भी,उनकी तो बात ही क्या-सड़क किनारे खड़े होकर चार गोलगप्पे तो खा नही सकते,दुनिया को मुट्ठी में लिए घूमते हैं.हां,तो मै कह रहा था कि जिन्दगी कभी किसी को पूरा नही देती.सिर ढंको तो पांव खुले रहते हैं,पाँव ढंको तो सिर उघाड़ होता है.ये दुनिया की अस्सी फीसदी आबादी की कहानी है.ये बात सुनकर बीस फीसदी लोग बड़ी अदा से मुस्कुराते हैं.हालांकि अधूरी जिंदगियों का चुसा हुआ खून इन 'पूरी' जिंदगियों की रगों में ही बहता है,ये बात और कोई माने न माने,कायनात जानती है.वो बेशर्मियाँ जो उन हयादार आँखों के सात पर्दे अंदर नाचती हैं,लाचारियाँ बनकर इन उघाड़ मादा जिस्मों में नुमाया होती हैं.ध्यान से देखिएगा ये तस्वीर धनबाद कोलफील्ड के मजूरों की भी हो सकती है और लुक पर से ध्यान हटा लें तो युगांडा और कांगो के कबायलियों की भी हो सकती है.आप में से बहुतों को यकीन हो न हो,ये तस्वीर हमारे,आपके बिलकुल करीब,बिलकुल नज़दीक उन मुसहर परिवारों की भी हो सकती है,जिनका इस हाल में होना सभ्यता के गाल पर जोरदार तमाचे की तरह है..
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