उस शाम अस्सी घाट पर गुनगुनी धूप उतर आई थी जैसे.सोनचिरइया जिस धरोहर को संवारने और संभालने के काम में जुटी है,इस धूप के कण उस विरासत की परम्परा में ही रहे हैं..और सांझ के उस पार खड़े टीले से उतरती इस धूप की गरमाहट से मेरे भी कुछ गहरे सरोकार वैसे ही रहे हैं,जैसे किसी भी गंवई मन के होते हैं,हो सकते हैं.इसीलिए शायद गहराती रात के साथ बिखरती इस धूप के कण मुझे कुछ ज्यादा ही महसूस हुए.सामने ओपन एयर मंच पर थीं लोक सुरों की गायिका मालिनी अवस्थी और नेपथ्य से मुख्य मंच पर बारी बारी से उतरती आती थी लोक कलाओं,लोक नृत्यों और लोकगीतों की छटाएं.ये खुले आसमान के नीचे,गंगा के गरम आंचल में शबनमी पुरवा बयार की सनसनाहट थी,जो सीढ़ियों पर बैठे बनारसियों का मन सुरीला किये जाती थी,सहलाती जाती थी,और यूँ गुजरती जाती थी.दृश्य ही वैसा था..आमने सामने मालिनी जी को पहली ही बार देख रहा हूँ.मंच उनके इशारों पर चलता है..लोक उनके शब्दों को सुनता है..कि इसी बीच अचानक उनकी नजर मुझपर पड़ती है.एक कौतुक उपस्थित हो रहा है.मै देख रहा हूँ.मालिनी जी बलइयां ले रही हैं.लोगों की भीड़ में मेरे भी होने की तस्दीक होते देख मेरा मन भींग उठता है.इतने में ही बस नही किया,मालिनी जी उठकर आती हैं और मेरे सामने खडी होकर कि जैसे मेरी नजर उतार रही हों..अपने अन्तरगह्वर में इस आदर और प्रेम के संयोग से भर उठता हूँ मै..महसूस करता हूँ कि कितना कुछ खाली ही था अबतक मुझमे..!
अनमोल भारतीय सांस्कृतिक विरासत के पन्ने एक एककर खुल रहे हैं.सोनभद्र का विलुप्त हो चला करमा नृत्य,बाबू नंदन राम के साथ बीत चली गाजीपुर मऊ की कठघोड़वा वाली धोबिया नृत्य परम्परा,झारखंड की छाऊ नृत्य शैली,राई नृत्यगीत,बुन्देलखण्ड की आल्हगीत परम्परा .... और .... और .... और .... लोकपरम्परा के अनेक गीत,लोकविरासत के अनेक नृत्य,लोक खजाने के अनेक मोती,लोकमंच के अनेक नगीने..इन विधाओं से जुड़े इन तमाम कलाकारों को ये मंच दिया सोनचिरइया ने..मालिनी अवस्थी ने..और पहुँचने के दो ही क्षण बाद ये महसूस हुआ कि मंच ने मन चुरा लिया है हमारा.मुग्ध मन उन थिरकते कदमों,थपकते मादल और उठती स्वरलहरियों में क्यों.कब और कैसे खो गया,ये समझने के लिए तो सोनचिरइया के अगले मंच का इंतजार किये बिना और कोई जरिया नही.एक एककर जब सारे नृत्य,सारे गीत और सारी प्रस्तुतियां संपन्न हो गयीं तो बाकी रह गया बस समापन प्रेजेंटेशन..और उसकी गुरुता की कोई कल्पना नहीं थी हमे.लेकिन जब वो शुरू हुआ तो रात थोड़ी और चौंधिया गयी..धूप थोड़ी और चटख हो गयी..और गंगा भी थोड़ी और मचल गयी..गंगा को छूकर उठती हवाओं की चाल मद्धम हो रही है..यहाँ वहां उड़ते तिनके,कीट-पतंगे सब आज के इस आखिरी दृश्य की गवाही भरना चाहते हैं.इसलिए अपनी-अपनी ठांव खोज रहे हैं.हर हर महादेव के घोष में वहां उपस्थित एक एक सांस सीढ़ियों पर ही दुबक जाती है..!
अब मंच पर है करमा,छाऊ,राई,धोबिया,आल्हा..सब एक साथ..और इन सबके साथ..सबके बीच..सुर उठाती,ताल नापती,पाँव थिरकती सोनचिरइया..गंगा तट की रमणीक संध्या मनोहर हो उठी है..होरी खेलें रघुबीरा अवध में,होरी खेलें रघुबीर.....चिर परिचित होरी गीत..लेकिन अनदेखी थिरकनें..चिर परिचित आवाज..लेकिन अनसुनी सुरतरंगें..चिर परिचित साज..लेकिन अनसुलझी थाप..बनारस का संगीत रसिक समाज घाट की सीढ़ियों पर इस दृश्य को पीते,जीते खो गया है कहीं और इधर मंच झकझोरकर नाच उठा है..मालिनी जी राई कलाकारों के हाथ पकड़ घूमर नृत्य में जा रही हैं.दो नन्हे कलाकार लोगों और कलाकारों के बीच गुलाब की पंखुरियों के ढेर लगा रहे हैं..अबीर भी है..गुलाल भी है..रंग भी है..तरंग भी है..मंच भी है..साज भी है..साजिन्दे भी हैं..नर्तक और नर्तकियां भी हैं..लोक भी है..रस और रसिक भी हैं..कुल मिलाकर लोकविधा अपने शवाब पर है..मन नाच नाच जाता है.मालिनी जी गुलाब की पंखुरियां लोक रसिकों पर लुटाती हैं..गुलाल उडाती हैं..अबीर उठाती हैं..और निचली सीढ़ियों पर सबसे आगे बैठे बनारसियों के गाल लाल करता एक मुट्ठी गुलाल मुझपर पहुंचकर समाप्त हो जाता है..ये एक कलाकार का अपने समाज के साथ लेनदेन है-आदर का,प्रेम का,संगीत का,परम्परा का....और इस साल का मेरा वसंतोत्सव मालिनी जी के हाथों मिले इस गुलाल से शुरू होता है..
अभिनन्दन मालिनी जी..! लोकधरोहर की लुप्तप्राय इस विरासत को सम्भाल रखने का आपका यह उद्यम एकदिन खुद विरासत बनेगा.सोनचिरइया अपने आप में एक धरोहर है..और सोनचिरइया की ये धरोहर बनारस की थाती है,हम किसी मुगालते में नही हैं.हाथ से हाथ मिलें तो धरोहर बचेगी.हृदय से हृदय मिलें तो धरोहर का संवर्द्धन होगा..सुर से सुर मिलें तो धरोहर का सम्मान होगा..अभिनन्दन मालिनी जी..! अभिनन्दन पुष्कर भाई..! अभिनन्दन आनन्द जी..! अभिनन्दन अवनीश..! अभिनन्दन अजित जी..! अभिनन्दन वरुण जी..! आप सबका प्यार अबतक मन के झरोखे से झिलमिलाता है..! सपरिवार मुझे उठवाकर अस्सी के घाट पर ला पटकने और इस जादुई शाम से रूबरू कराने का शुक्रिया तपन..! शुक्रिया दोस्तों...!!!!!
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