Monday, 28 September 2015

थ्री इंजन एयरक्राफ्ट

भारत को थ्री इंजन एयरक्राफ्ट की संज्ञा दी जाती है । इसमे पहला इंजन है खेती,दूसरा है शिक्षा व स्वास्थ्य का क्षेत्र और तीसरा है इंडस्ट्री ।भारत एक कृषि प्रधान देश है,यह वाक्य पढ़-पढ़कर बड़ी होने वाली कई पीढ़ियाँ मर-खप गईं,लेकिन यह वाक्य है कि बेहद बदहाल कृषि व्यवस्था वाले इस देश मे अभी तक कायम है और वैसे ही कायम है ।कायम इसलिए है कि कुल उपायों के बाद भी अभी तक खेती को चैलेंज करने की हालत मे नहीं है सरकार या समाज ।निकट भविष्य मे खेती का विकल्प तैयार हो जाने का कोई कौतुक भी नहीं होने जा रहा है ।तीनों ही इंजनो से काम लेने और एयरक्राफ्ट को संतुलित वेग देने के बजाय सरकारों ने उद्योग की पूंछ पकड़ ली और उसे विकास के नाम से जोड़ दिया ।नागरिक-सुविधा,स्वास्थ्य व शिक्षा का क्षेत्र सेवा का क्षेत्र है,लेकिन खुलेआम लूट का क्षेत्र बना हुआ है ।कृषि को और इसीलिए गाँव को भी पूरी तरह उपेक्षित और पीड़ित क्षेत्र बनाकर रखा गया है ।अब हालत ये है कि कृषि वाला इंजन सेवा तो पूरी दे रहा है लेकिन उसे खुराक कुछ नहीं दी जा रही है ।कृषि भूमि के रूप मे भारत के पास अकूत शक्ति और संपत्ति है जिसे देश ने इस काम के लिए अलग विभाग और विशाल वेतनभोगी अमला होने के बावजूद कभी कोई तवज्जो नहीं दी ।यह इंजन अभी तक तो बिना एक भी लीटर तेल के दौड़ रहा है ।

1947 से लेकर अबतक देश को औद्योगिक स्वरूप देने की जो कवायदें हो रही हैं,वो सारी मेहनत केवल एक इंजन पर हो रही है,जो उपलब्ध संसाधन का लेता तो बहुत है,लेकिन देता बस कचरा है ।क्योंकि उद्योग जो जीवन शैली देता है,वह भारत के अनुकूल नहीं है इतना ही नहीं,वह विनाशकारी भी है ।असली विकास कृषि की उन्नति मे है,क्योंकि कृषि ही आज भी देश की रीढ़ है,सौ वर्ष बाद भी कृषि ही रहेगी ।अबतक देश के लोकतन्त्र ने एक भी ऐसी विवेकवान सरकार नहीं दी जिसने वास्तव मे काम करने की अहद की हो,सब के सब बकवास ही करते रहे,विकास  ही करते  रहे ।तुम शहरों मे सड़क बनवाते हो कहते हो देश का विकास कर रहे हैं ।तुम शहरों मे फैक्ट्रियाँ लगाते हो कहते हो  देश का विकास कर रहे है ।तुम गाँव के गाँव खाली किए दे रहे हो कहते हो देश का विकास करके मानेंगे देश मे लोगों के पास दो जून का खाना नहीं,पेयजल के नाम पर लाखों लाख लोगों को आर्सेनिक पिला रहे हो कहते हो देश को डिजिटल बना रहे हैं ।जिनकी ज़िंदगियों मे अगले पल का भरोसा नहीं,उनको राष्ट्रवाद की जहरीली सुई देकर राष्ट्रद्रोही और राष्ट्रभक्त होने के सर्टिफिकेट बाँट रहे हो कहते हो हम देश को आगे ले जा रहे हैं......और यह सब तब हो रहा है जब किसानी के जानलेवा घाटे तले दबकर अन्नदाता किसान आत्महत्या कर रहा है,देश के नागरिकों के स्वास्थ्य पर अमेरिकी दवा कंपनियों के मुनाफाखोर प्रयोग चल रहे हैं और नन्हें नौनिहालों की शिक्षा दीक्षा का भार शिक्षा मित्र कहे जाने वाले सड़कछाप शिक्षकों के भरोसे बिसूर रही है ।

अब जिस एयरक्राफ्ट के एक इंजन को चूसकर दूसरे इंजन मे तेल भरा जा रहा हो
,तीसरे इंजन को निष्क्रिय उसके हाल पर छोड़ दिया गया हो,उसकी सफलता पर आशंकाओं के बादल तो उठेंगे ही ।आप करते रहिए इंडस्ट्री इंडस्ट्री का शोर,मांगते रहिए दुनिया भर घूम-घूम के भीख और उड़ाते रहिए विकास का उड़खटोला ।ये एयरक्राफ्ट लुढ़केगा हुज़ूर ।आप झूठ बोल रहे हैं कि हम देश का विकास कर रहे हैं ।हम जानते हैं कि आप न करिए तो भी विकास होता ही रहेगा,होता ही रहता है ।यह सहज प्रक्रिया है जीवन की ।हमे पता है कि रीढ़ सीधी रखने के उपाय किए बिना आप जो कुछ भी करेंगे,सब केवल छलावा मात्र ही होगा ।अमेरिका का स्टारडम देख-देखकर देश दशकों से झूम रहा है,आप भी झूमाइए,लेकिन देश को झुमरीतलैया मत बनाइये हुज़ूर......!!

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