उस दिन हम दुर्गाकुंड तालाब के पास तिराहे पर खड़े उज्ज्वल से कुछ बातें कर रहे थे। एकदम से अचानक सुनाई पड़ा कोई उज्ज्वल,उज्ज्वल चिल्ला रहा है। आवाज जनाना लेकिन टोन पूरा मर्दाना। अगल-बगल नज़र दौड़ाई तो आवाज़ देने वाली आफत की परकाला नज़र आई। सामने से भागते ऑटो के अंदर केवल उसके पाँव थे बस। दोनों हाथों से दरवाजे के हैंडल पकड़े पूरा धड़ ऑटो से बाहर निकाले वो चिल्ला रही थी उज्ज्वल...अबे ओ उज्ज्वल...उज्जवलवा...! जबतक मै उसे देख पाता, तबतक ...मर जा स्साले... बोलते हुए वो ऑटो वाली लड़की ये जाऔर वो जा...!
मैंने चकित,थकित और व्यथित नज़रों से देखते हुए पुत्र से पूछा- कौन है ये लड़की...? अरे ये तो अयुषिया है पापा,मेरे साथ पढ़ती है। बहुत कमीनी है-पुत्र ने जवाब दिया। वाह यार,क्या दोस्ती है ये....! ये लड़की है कि आफत....! मुझे मालूम है मै अपनी खीझ मिटा रहा था औरUjjwal Pandey अपनी झेंप मिटा रहे थे। ऐसी बिदास लड़की अबतक तो नहीं देखी थी मैंने। कुछ ही दिन बाद जब वो दूसरी बार दिखी तो विद्यापीठ मे कुछ फीस वगैरह जमा करने आई थी। मै सीढ़ियों से उतर रहा था और वो लड़कियों के झुंड मे ऊपर ही खड़ी थी कि इतने मे उसके हाथ से कोई कागज छूटा और लहराता हुआ नीचे आ गिरा। तबतक मै नीचे उतरा ही था कि उसकी आवाज़ सुनाई पड़ी-अंकल जी,जरा वो पेपर थमा दीजिएगा। मना करने की कोई गुंजाइश थी नहीं। आधा वो नीचे जरूर आई लेकिन पेपर देने के लिए वापस आधा मुझे चढ़ना ही पड़ा।
इधर कई दिनों से देख रहा था शहर के चौराहों पर बड़ी बड़ी होर्डिंग्स मे एक नाम बड़े बड़े अक्षरों मे--काशी विद्यापीठ के छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी की प्रत्याशी Ayushi Shrimaliको वोट दें। मैंने उज्ज्वल से पूछा-वही.....? जवाब मिला-हाँ पापा वही... smile emoticon परसो खबर मिली की चुनावी वर्चस्व की लड़ाई मे कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। थाना पुलिस हुआ। पता चला उसकी एक उंगली टूट गयी। हमे लग तो तभी गया था,लेकिन मुहर आज लगी। आज विद्यापीठ मे चुनाव था। आयुषी काफी मतों से जीती। उसको सहानुभूति के वोट भी मिले। आज लड़की जीप के बोनट पर खड़ी एक साथ रो भी रही थी और नाच भी रही थी। सोचा आज नीतीश को बधाइयों का तांता लगा हुआ है। लगे हाथ एक बधाई इस आफत को भी राजनीति मे उसकी ऊंचाइयों के लिए। खूब आगे जाओ,खूब तरक्की करो आयुषी...
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