लगातार 124 घंटे नाचते रहने का जिद्दी संकल्प..और विश्व रिकॉर्ड बना ले जाने का बड़ा सपना...! मंच पर लहराता हुआ घुमेरदार घाघरा...और हाल मे लहराते हुए हजारों हाथ, गडगड़ाती तालियाँ, अपलक आँखें, उठता शोर, बजते नक्कारे, पखावज, ढ़ोल और मृदंग का जोश। हाल मे चलती सांसें इस सपने के साथ साथ यात्रा करते कई पड़ाव पार कर आई हैं...और आज इस वक़्त जब मै ये सब लिख रहा हूँ तो पचहत्तर घंटे पूरे हो चुके हैं, लेकिन लरजते हुए पाँवों मे कोई थरथराहट नही है। संकल्प का ओज जरा सा घटा नही है, चेहरे का नूर इतना सा भी कम नही हुआ है, आँखों मे तेज धुंधलाया नही है, भूख प्यास की बात नही है, उसकी कोई जात नही है, जज़्बा है,जज़्बात नही है, नयनों की सेज पर सपनों का पानी है, बनारस की एक बेटी ने कुछ कर गुजरने की ठानी है। घाट प्रतिघातों से भरी हुई,तिनगी का नाच नाच रही इस दुनिया से बेखबर सोनी चौरसिया तीन दिनों से केवल नाच रही है, बस नाच रही है।
कथक नृत्य मे विश्व कीर्तिमान बनाने की लालची एक लड़की धीरे-धीरे मंजिल की ओर बढ़ रही है। भजनों की धुनों पर नाचती हुई इस लड़की को भजनों से ही आंतरिक ऊर्जा मिल रही है। हर चार घंटे पर बीस मिनट विश्राम की अनुमति है गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड टीम की ओर से। यह समय वह बचाती है और पाँच मिनट मे ही नारियल का पानी पीकर फिर मंच पर आ जाती है। थोड़े से चने या कच्चे पनीर के टुकड़े,मेथी या दलिया बस इतना ही खाती है। अभी उनचास घंटे शेष बचे हैं,लेकिन उसके इरादों मे कहीं थकान नज़र नही आती है। 14 तारीख की सुबह नौ बजे शुरू हुआ सोनी का यह अभियान परसो उन्नीस तारीख को दिन मे एक बजे जब थमेगा तबतक वह इतिहास रच चुकी होगी। यह रिकॉर्ड अभी केरल की हेमलता के नाम है,जिसने लगातार 123 घंटे 15 मिनट नृत्य का रिकॉर्ड बना रखा है। केवल रिकॉर्ड बनाने के लिए यह कोई साधारण नृत्य हो,ऐसा भी नही,भजनों के अलावा ठुमरी, गजल, टुकड़ा और तिराई के साथ साथ शास्त्रीय बन्दिशों पर शास्त्रीय नृत्य थिरक रही है सोनी।
आर्य महिला पीजी कॉलेज का सभागार खचाखच भरा हुआ है। आगे की ओर लड़कियों का हुजूम है,उनके हाथों मे तख्तियाँ हैं,लड़कियां सीटियाँ बजाती हैं और सोनी उत्साह से लबरेज हो जाती है। वही सामने बैठे हैं पिता श्याम और माँ मधु...बैठे बैठे होठ बुदबुदाते,आँखें बंद किए ध्यान लगाते,अनादि शक्ति से अपनी बच्ची के लिए आशीष मांगते। माँ की आँखें अब तीन दिन बाद डबडबाने लगी हैं। बेटी के बीमार पड़ जाने की चिंता माँ को सताने लगी है। लोग जुडने लगे हैं। शहर जुटने लगा है। संस्थाएं आगे आ रही हैं। सोनी चौरसिया के सपने के पीछे बनारस खड़ा हो रहा है। उपेक्षा और उपहास के चरण बीत गए, अब समर्थन का समय है। शहर मे आज दुआओं का आलम है। कहीं हवन और यज्ञ हो रहे हैं तो कहीं दुआख्वानी भी चल रही है। आधे से ज्यादा का सफर पूरा होते देख बधाइयाँ आने लगी हैं। माँ कहती है कितना भी कठिन काम हो,सोनी कर ही डालती है। उसने हमेशा कठिनाइयों से गुजरकर आगे बढ्ने की राह बनाई है। आज यहाँ इस मंच पर आने के लिए भी सोनी सालभर से योग और प्राणायाम का नियमित अभ्यास कर रही थी। प्रतिदिन छः घंटे नृत्य का अभ्यास और रोज दो घंटे गंगा मे तैराकी उसके प्रिय शगल हैं।
स्कूल के दिनों से ही स्केटिंग और बुलेट बाइक चलाने की शौकीन रही सोनी चौरसिया ने 2004 मे पर्यावरण जनजागरूकता अभियान के लिए बनारस से लखनऊ तक स्केटिंग की थी। चंडीगढ़ से लद्दाख तक ऊंची पहाड़ियों पर बुलेट चलाकर पहुँच चुकी ये लड़की आत्मविश्वास से भरी हुई इस समय भी,जबकि मै उसकी कहानी लिख रहा हूँ, बस मगन मन इसलिए नाच रही है, उसकी कला को उसका मान मिले,उसको उसका वाजिब सम्मान मिले। तुम्हें हमारी शुभकामनाएँ सोनी....!
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