Monday, 16 November 2015

आज़ादी के बाद

आज़ादी के बाद जो इतिहास लिखा गया वह कोरी गल्प नही है। हाँ,बिलकुल ईमानदार बात यह है कि वह कोरा सत्य भी नही है। लंबे समय तक शासन मे रहकर कांग्रेसी इतिहासकारों और बाद मे वामपंथियों ने जो इतिहास लिखा,उसमे ये किया कि दूध के गिलास से एक कप असल दूध निकालकर उसमे अपना एक कप पानी मिला दिया। हाँ,यह हुआ है....लेकिन सिर्फ इतना ही हुआ है। वही एक कप पानी मिलाया हुआ इतिहास पढ़कर हम बड़े हुए हैं। लेकिन अब सनातन गौरव के नाम पर जो इतिहास लिखने,बदलने की कवायद चल रही हैं,वो उससे अधिक खौफनाक हैं,क्योंकि दूध का पूरा गिलास ही रिप्लेस करके वहाँ गंदे पानी का गिलास रखा जा रहा है। गैरजरूरी मुद्दों पर देश मे इतना शोर है ही इसलिए ताकि ये सारे जरूरी काम साइलेंटली किए जा सकें। टीपू सुल्तान के खिलाफ उठने वाली ये आवाजें उसी दिशा मे हैं। अब ये ताजा इतिहास पढ़कर जो पीढ़ियाँ निकलेंगी,उनसे पीढ़ियों का टकराव होगा। नीव सोच समझकर डाली जा रही है। मोदी जी,आप चाहें तो लालू से थोड़ा अधिक चारा खा लीजिये लेकिन हमारा भाईचारा लौटा दीजिये हुज़ूर।

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