आज अखबारों ने लिखा है कि कल बनारस मे मोदी का मेगा शो हुआ और इस शो से काशी बहुत अभिभूत हुई। यूं ऐसी बातें और घटनाएँ कई और भी हुईं जिनपर बाकी का देश भी कम अभिभूत नही हुआ...कि जैसे शिंजों ने हिंदुओं की तरह गंगा की आरती की....कि जैसे अबे को माथे पर तिलक लगाया गया...कि जैसे अबे ने हर हर महादेव भी बोला और दोनों हाथ ऊपर उठा के भी बोला...कि जैसे मोदी ने शिंजों को हिन्दू धर्म मे दीक्षित कर दिया...और बनारस के साथ ही देश की कई समस्याओं, मुसीबतों और भविष्य का एक साथ सामूहिक रूप से दिव्य निपटान हो गया। हम सभी को मालूम है कि देश को पहली बार कोई "ऐसा" प्रधानसेवक मिला है, जो विदेशों के प्रधानसेवकों को आरती पूजा करवाने और तिरंगे को सलाम करवाने के लिए कितने कष्ट उठाकर दुनिया भर मे घूम रहा है। वो इंग्लैंड के प्रधानसेवक से जन गण मन गवा देता है, ओबामा जैसे अपने देश के प्रधान प्रधानसेवक को ओबमवा कह के भी बुला सकता है, नवाज शरीफ को डांट के कई बार बैठा देता है और जापान देश के प्रधानसेवक को बनारस तक बुला लाता है। खास बात ये कि इस मृत्युलोक मे ये सब पहली बार हो रहा है। पहली बात तो ये कि देश मे इसके पहले कभी कोई प्रधानसेवक हुआ ही नही, इसलिए कभी और कहीं से कोई और प्रधानसेवक आया भी नही। ये सब जो कुछ हो रहा है, सब पहली ही बार हो रहा है,इसलिए हमे ये कहने का नियाज हासिल होता है कि देखा.......! अभी देखा कि नही देखा......!! smile emoticon smile emoticon
वैसे एक काम की बात बताऊँ कल के इस मेगा शो के बाद मुझे याद आ रहा है कि एक बार गंगा ने मोदी को बनारस बुलाया था। अब मुझे लग रहा है कि डेढ़ साल मे गंगा मोदी से दुखित हो गयी है और उसने अपनी फ़ोरेन पॉलिसी मे कुछ बदलाव किया है। इसीलिए कल उसने अबे को अपना हाल देखने बुलाया था। इसी बहाने ये भी देख लेंगे कि काशी जब होती है तो अभिभूत भला कैसे होती है। काशी को अभिभूत होता देखने से ज्यादा और है ही क्या बनारस मे जो दिखाया जाता। ले दे के बाबा की एक बूटी वाली गोली जरूर होती है, और वो सब खाये ही हुए थे। बाबतपुर हवाईअड्डे से लेकर दशाश्वमेध घाट तक का कुल सड़क मार्ग लगभग 22 किलोमीटर है। कल कुल जमा काशी को गठरी मे बांधकर इसी 22 किलोमीटर सड़क पर फैला दिया गया था। सारे के सारे मेगा शो को भी इसी सड़क पर रस्सी बांध के लिटाया गया था। झाड़ू, चूना, पेंटिंग, सड़क, डिवाइडर सारी सुविधाएं खींच तानकर इतनी सी दूरी मे समेट लाना कोई कम मशक्कत का काम नही था और खास उल्लेखनीय बात ये कि ये पूरी बेशर्मी के साथ जनधन की अमानत मे खयानत करके ये नौटंकी प्रस्तुत करने मे हमारा प्रशासन और हम सब सफल रहे। इस बाइस किलोमीटर सड़क के बीच कुल दो वीआईपी पड़ाव थे। एक था फाइव स्टार होटल और एक था फाइव स्टार घाट। रात के राजभोज मे थे शहर के फाइव स्टार साठ सत्तर अभिजन। अबे ने बोनजाई काशी देखी वो भी क्या देखी भला। कहीं सच मे काशी कहीं दिख न जाय, इसी एक काम मे तो देश की केंद्रीय व्यवस्था महीने भर से लगी पड़ी थी। प्रधानमंत्रियों के दौरे तो हमने भी बहुत देखे, बनारस मे भी देखे लेकिन प्रधानसेवकी के ये ठाट अबतक नही देखे थे। असली काशी के ये कुछ ऐसे चित्र पोस्ट कर रहा हूँ, जिनके होने और न होने का संबंध सीधे काशी के अस्तित्व से है। इस अफसोस के साथ कि असली काशी यही है और ऐसे मेगा शो इस काशी को बहुत भारी पड़ते हैं।
अगर व्यापार भी करने आए थे तो क्या पाया क्या खोया मोदी जी। ये जान लें तो होश ही फाख्ता हो जाएँ कि दो दो प्रधानसेवकों को दुनिया की उच्चतम मानकों पर मुहैया कराई गयी सुरक्षा और आवभगत पर चायवाले ने कितने खर्च को मंजूरी दी...? 98 हज़ार करोड़ की भीख पर क्यो इतराते हो देश, तुम्हारे लाखों करोड़ तो उन कोयला चोरों की ही जेब मे पड़े हुए हैं, जो तब उनकी ठकुरसुहाती मे थे, अब इनकी ठकुरसुहाती मे हैं। सत्ता के अंधेरे तलघरों की सच्चाईयां अगर जान ले जनमानस तो इस मेगा शो को महाक्रांति मे बदलने से न मोदी रोक पाएंगे...न अबे शिंजों.....!
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