देश के जो मुसलमान अभीतक अपने को मुगलों की ही औलादें मानते हैं, उन्हे बाहर निकलकर आना चाहिए और जो हालत उनके शासक पूर्वजों ने विभिन्न समाजों की की है, उसकी नैतिक और ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिए। जिस तरह मजहब और साम्राज्य को बढ़ाने के नाम पर हिंसा का तांडव झेला है हमारी धरती ने, हमारा वह इतिहास सर्वथा निंदनीय है...! आस्थाओ की टकराहटों पर सत्ता के प्रभाव ने सवारी की और भारत मे गुलामी का वह दौर लंबा चला, जब आम आदमी केवल पिसने के लिए जीता रहा। ये हिन्दू मुसलमान का जो सार्वकालिक संघर्ष हैं, वह इसी गुलामी और अभावों के कारण है। सामाजिक अभाव भी हैं और धार्मिक कहे जाने वाले सांप्रदायिक अभाव भी हैं। ऐसा न होता तो आज के दिन तक दोनों दोनों की आस्थाओं पर चोट नही कर रहे होते, तब हमारा सामाजिक जीवन आगे होता, धार्मिक जीवन थोड़ा पीछे ही होता।
निश्चित रूप से इतिहास की गलतियों की सजा वर्तमान को नही दी जानी चाहिए, पर जो गलती आज हो रही है, उसका क्या....? ईशनिन्दा संकुचित सोच और कट्टर भाव विचार वालों का विषय है। होती है होती रहे, उससे आपके पारिवारिक, सामाजिक जीवन मे क्या खलल पड़ रही है...? किसी की मर्जी वो अल्लाह को गाली देकर खुश है, किसी की मर्जी वो सरस्वती की नंगी तस्वीर बनाकर खुश है, किसी की मर्जी वो कुरान की आयतों को शैतानी आयतें कहकर खुश है..., आपको उससे क्या दिक्कत है...? वृहत्तर समाज मे नास्तिक भी तो रहते हैं, वे भी सम्मानित पदों पर हैं, समाज के बीच जी रहे हैं। समाज की समझ और उन्नति को बाधित करने वाली कुरीतियों, आडंबरों, अंधविश्वासों के बहाने कोई किसी मजहब का विरोध भी करता है तो जुबानी ही तो करता है, आपको क्या परेशानी है...?
अगर कोई आपके या अपने ईश्वर का अपमान करता है तो उसके लिए कानूनी विधान हैं, आप उसका सहारा लीजिये, आंदोलन आपका अधिकार है कीजिये, लेकिन हिंसा का आवाहन करने वाले प्रदर्शन आंदोलन नही कहलाते। आपलोग अयोध्या, अजमेर से बाहर आइये, आप किसी की मुंडी मांगने वाले प्रदर्शनों और इस अनावश्यक गुस्से से निजात पाइये। न तो मनुष्य की यह सभ्यता है, न स्वभाव। कोई लगातार हमारी प्रशंसा कर रहा हो, तब तो हम उसकी प्रशंसा करते ही हैं। कोई हमारे खिलाफ हो, हमारी आस्था के खिलाफ हो, हमारा अपमान करता हो तब भी हम उसका सम्मान कर सकें, सहिष्णुता इसको कहते है। मत करिए सम्मान, खुद को तो ठीक से प्रस्तुत कीजिये। सम्मान रक्षा न भी हो, आप तो मुंडी मांग रहे हैं...!
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