असहिष्णुता पर फेसबुकिया बहस एक बार फिर गरमाई हुई है। दो रवैये हैं। एक है असहिष्णुता की निंदा करना और दूसरा है देश छोडकर जाने की बात करना। हिन्दू मुसलमान की छोड़िए, लेकिन विरोध के प्रति असहमति जताने का तरीका बेहद असहिष्णुता की तरफ बढ़ रहा है, इसमे कोई शक नही। अगर कोई गाली देकर पूछता है कि कहाँ बढ़ रही है बे असहिष्णुता......तो सहिष्णुता के पतन पर कहने के लिए कुछ ज्यादा बचता नही।
ताजा मामला आमिर खान के एक बयान से उपजा है। मै आमिर खान या किसी और के उस विचार को कूड़े के भाव समझता हूँ, जो कहता है कि हम देश छोड़ देंगे...! ये कायरता भी है और आमीर खान जैसे अबतक सुलझे हुए दिख रहे आदमी के मुंह से निकले तो अलोकतांत्रिक और असामाजिक भी है।...हालिया इतिहास पर नज़र डालिए तो गुजरात मे मुसलमान ने अपवाद छोडकर मोदी को वोट कभी नही किया और उन्होने वहाँ जो असहिष्णुता झेली, कम से कम देश मे अभी वो हालात तो नही हैं, लेकिन गुजरात के आम मुसलमान ने देश छोडकर कहीं और जाने की बात कभी नही की। इसलिए मै मानता हूँ कि गुजरात का मुसलमान आमिर खान से तो बहुत ज्यादा सहिष्णु मुसलमान है। आमिर खान इस देश के बड़े मुसलमान हैं। पैसे वाले मुसलमान हैं। वे देश छोडकर बिना रार मचाये भी कहीं जा सकते हैं, लेकिन देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उन्हे यह भी बताना चाहिए कि अगर ये देश इतना खतरनाक हो गया है तो वे लोग कहाँ जांय जो उनकी तरह पैसे वाले नही हैं, जिनके पास दूसरे विकल्प नही हैं और जिन्होने अपनी जेबें ढीली कर करके उन्हे आमिर से अमीर बना डाला।
देश छोडने की बात करना अपने आप मे बड़ी असहिष्णुता है और हो सकता है कि देश छोडने का माहौल बनाने के पीछे इनके और भी कारण हों..! देश के अमीरों का काला धन विदेशों मे पड़ा है, हम किसपर विश्वास करें। देश छोडकर जाने के पीछे कहीं ये "काला" कनेक्शन तो नही...! आमिर खान का मुगालता दूर हो, इसके लिए कहना चाहूँगा कि सारी दुनिया के रंजोगम पर एक नज़र दौड़ा लो भाई, अपनी इस मिट्टी से ज्यादा महफूज तुम्हें और कोई जगह मिले तो बताना। ई गोला से ऊ गोला तक खोज के आना फिर बताना। फिरकियाँ हर जगह ली जाती हैं, फिरकियाँ तुम्हारे ये कहने के बाद तुम्हारी भी ली जा रही हैं। खून से लथपथ देशों से तुम्हारे लिए बुलावे आ रहे हैं तो जवाबदेही तुम्हारी ही बनती है। आज भी भारत मे एक आम हिन्दू मुसलमान को चैन से रहने, बोलने और जीने की आज़ादी है, जो और जगहों पर नही है। दुनिया के दूसरे देशों मे मजहबी वर्चस्व की लड़ाइयाँ खूनी खेल खेल रही हैं, क्या तुम्हें मालूम नही है सत्यमेव जयते....?
सहिष्णुता हमारे मूल्यों का मूल्य रहा है. हाँ ये सही है कि कुछ लोग ये समझ के बात करते हैं कि देश मे कॉंग्रेस का लंबा शासन रहा है इसलिए सहिष्णुता भी शायद कोई कोंग्रेसी मूल्य है...विरोध और असहमति की स्थिति मे सरकारी कारिंदों और मंत्रियों से लेकर देश का कट्टर हिन्दू मुसलमान तक जिस भाषा और तेवर मे बात कर रहा है, वो असहिष्णुता का ही नमूना है। ......ऐसा बिलकुल नही है कि आमिर ने कह दिया तो केवल हिन्दू असहिष्णु हो रहा है...असहिष्णु तो मुसलमान भी हो रहा है......! उदाहरण खोजने कहीं और नही जाना पड़ेगा। सब यहीं दिख जाएगा..सोशल मीडिया कहे जाने वाले इन्ही अनसोशल पन्नों पर। सहिष्णुता असहिष्णुता पर बहस कर लो यार, देश और समाज तुम्हारा भी है,लेकिन देश छोड़ के जाने की बात करते हो तो बेगाने लगते हो आमिर खान, और गधे भी लगते हो...!
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