Thursday, 31 December 2015

पाकिस्तान के साथ

हम भी तो यही कहते रहे हैं कि मेल मिलाप रखो, दोस्ती रखो, इसके अलावा और कोई रास्ता नही है। आप ही लोग तो बोलते थे हम तो पाकिस्तान को उड़ा देंगे, पाकिस्तान से मुंडी लाएँगे,... सैनिकों के सिर काटने वालों को बिरियानी खिलाई जा रही है....ब्लाह ब्लाह ब्लाह.......हम जानते हैं पाकिस्तान के साथ मैत्री के अलावा कोई रास्ता नही है। आप पाकिस्तान के साथ परमाणु युद्ध नही लड़ सकते...दोनों खत्म हो जाएँगे,। पड़ोसी है वो, बदल नही सकते। प्यार से राजनीति कर लो। सरकारी तौर पर थोड़ा दुष्ट पड़ोसी जरूर है, पर उस जमीन मे हमारे पूर्वजों के रक्त मिले हुए हैं। आप युद्ध करके नही कर सकते इस समस्या का समाधान..भावनात्मक मसले हैं, खून खच्चर सब हो जाता है। चार बार लड़ चुके हैं। बड़प्पन के साथ कुछ लेनदेन करके छोटे भाई को साध लीजिये, लेकिन ये साधने का काम भी कॉंग्रेस की सरकारों ने रूटीन वर्क की तरह चलाया है। चालीस साल से तो मै ही देख रहा हूँ बातचीत का ये ओफिशियल अंदाज़। अगर आप इस तरह अपने लोगों को चौंकाकर कभी थाईलैंड मे, कभी खुद पाकिस्तान मे उतरकर पाकिस्तान को साध रहे हैं तो यद्यपि इसके खतरे बहुत हैं, फिर भी अंतिम समाधान यही है। ऐसे ही करना पड़ता है मोदी जी, आप भी ऐसे ही फिर जाइए। परसो सवेरे की चाय पीकर वापस आ जाइयेगा। नवाज शरीफ को भी दो कंटाप धर के पकड़ लाइये। आम लोगों का आना जाना आसान बनाइये। इसी सरगर्मी से राह निकलेगी। बजरंगी भाईजान जैसी जरा सी सरगर्मी होती है तो दोनों देशों के समाज एकदम उमड़ पड़ते हैं एक दूसरे के लिए। कटुता तो केवल धार्मिकों और राजनीतिकों की है। भारत हो या पाकिस्तान, आम जन के सुख दुख दोनों तरफ एक ही जैसे हैं। युद्ध और कटुता केवल अंधकार की तरफ ले जाते हैं।

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