Saturday, 19 March 2016

हम अपने गौरवशाली इतिहास की फिराक मे नही, हम अपने लिए गौरवशाली भविष्य की फिराक मे हैं।

एक बार दो जर्मन नेशनल्स बनारस आए तो मुझसे मिलना हुआ। वे दोनों लविंग कपल थे लेकिन शादीशुदा नही थे। जल्दी ही शादी करने वाले थे और एकदूसरे के प्रति बला की हद तक आग्रही थे, समर्पित थे और वचनबद्ध भी थे। मेरी बेटी की स्लैम बुक मे dearest one के कालम मे दोनों ने ही एकदूसरे का नाम लिखा था-आन्या और फैबियन। दोनों ही समाजशास्त्र के शोधार्थी थे। मेरे घर वे दोनों हिन्दी सीखने आते थे। लगभग छः महीने का ये साथ था हमारा। उन्हे हिन्दी सिखाने के क्रम मे हम उनसे हिन्दी मे बातचीत खूब किया करते थे। राजनीतिक, सामाजिक विश्व की तमाम हलचलों पर उन दोनों से खूब चर्चा होती थी। अन्ना हज़ारे का आंदोलन रंग बिखेरे हुए था उन दिनों और भ्रष्टाचार के विरुद्ध देशभक्ति की भावना देशभर मे हिलोरें ले रही थी। जाहिर है कि हम शुरुआत अखबारों मे छपे समाचारों पर चर्चा और संवाद से किया करते थे। इसी तरह की एक चर्चा मे एकदिन फैबियन ने मुझसे पूछ लिया कि ये अखबार मे जो देशभक्ति लिखा रहता है, उसका मतलब क्या है....? मैंने राष्ट्रीयता की भावना और अपनी मिट्टी के प्रति लगाव व निष्ठा के कई एक किस्से और दृष्टांत सुनाकर देशभक्ति का अर्थ उसके दिमाग मे उड़ेलने की कोशिश की, लेकिन उसको ये सब बताते हुए मुझे समझ मे ये आया कि देशभक्ति का अर्थ उसे अच्छे से पता है। वो कहना कुछ और चाहता था। उसने मुझसे जर्मन और अँग्रेजी मिश्रित हिन्दी मे जो पूछा, उसका अर्थ ये था कि अपनी धरती पर पैदा होने के कारण अपनी माँ की तरह उससे प्यार तो हम भी करते हैं, लेकिन हम ये नही समझ पाये कि आपलोग इतना देशभक्त क्यो होते हैं...? मै उसके इस सवाल से थोड़ा अचकचाया जरूर लेकिन समझाने की पूरी कोशिश की कि हम अपने अतीत पर गर्व कर सकते हैं इसलिए गर्व करते हैं। इस धरती ने अनेक वीर और महापुरुष पैदा किए हैं इसलिए हम इसका सम्मान करते हैं। हम अपने देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए जरूरत पड़ने पर जान देने के लिए तैयार रहते हैं। कारगिल युद्ध के दौरान हमारी सिविल सोसाइटी मे बहुतों ने गाँव और शहर का भेद मिटाकर सीमा पर जाने के लिए आवेदन दे डाले थे। हम अपनी मिट्टी को, अपनी प्रकृति को प्यार करते हैं। हम कृषि प्रधान देश हैं। हम धार्मिक देश हैं। हम राम और कृष्ण के वंशज हैं। हमारा इतिहास गौरवशाली इतिहास है। आदि आदि आदि आदि....हमने अपनी देशभक्ति के पीछे के हज़ार कारण उन दोनों को गिनवाए, लेकिन दोनों का माथा सिकुड़ा ही रहा। फिर मैंने पूछा-- तुमलोग हमारी तरह देशभक्ति फील क्यो नही करते...? मेरे इस सवाल का जवाब आन्या ने दिया। वो बोली--हम इसलिए देशभक्ति फील नही करते क्योंकि हमारा इतिहास गौरवशाली नही है और हमारे यहाँ वीर भी पैदा नही हुए और महापुरुष भी नही और भगवान भी नही। हम ध्यान से सुन रहे थे और उसका मानस परखने की कोशिश कर रहे थे। कि तबतक आन्या ने कुछ खास कह दिया। मुझे लगा शायाद मेरा समाधान ही हो गया। वो अचानक थोड़ी देर के लिए चुप होकर बोली-- किताबों मे गौरवशाली-गौरवशाली करके लिखा बहुत कुछ है, लेकिन हम कभी हिटलर को नही भूलते। हम गोयबल्स को नही भूलते। हम उन किताबों को नही पढ़ते, जिनमे झूठा इतिहास लिखा पड़ा है। जिनमे काल्पनिक बातें लिखी रखी हुई हैं। जिनमे जर्मनी को महान-महान लिखा हुआ है। हम उन किताबों की खोज मे रहते हैं, जिन्हे गोयबल्स ने जला डाला था।...वो अकेली बोल रही थी। मै, फैबियन और बाकी लोग सिर्फ सुन रहे थे। वो कह रही थी--हम लोग स्टूडेंट्स हैं। हम सोचते हैं कि हम खुद जर्मनी को महान बनाएँ। हम चाहते हैं कि हिटलर का नाम रबर से मिटा सकें तो मिटा दें। हम अपने गौरवशाली इतिहास की फिराक मे नही, हम अपने लिए गौरवशाली भविष्य की फिराक मे हैं।

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