Saturday, 19 March 2016

वहाँ पच्छिमी गेट पर खड़ा है बसंत


 
ये पछुआं हवा तो देह पीट रही है, पतझार का मौसम पछोर रही है और मन की लहरों मे हिलोरें उगा रही हैं। फागुन नियरा आया है नही बल्कि दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया है। प्रवेश मांग रहा है, आइडेंटिटी कार्ड दिखा रहा है कि ठीक से देख लो हमी हैं। हर साल आते हैं। भीतर तो आने दो। लेकिन नही साहब, हमारा मन अभी लहरों मे नही, भँवरों मे फंसा हुआ है। अभी कैसे आने दें इनको। हिंदुस्तान अभी फगुआया नही है। ये जेएनयू और ये आरक्षण जबतक पूरी तरह खतम नही हो जाते तबतक होरी नही मनाएगा देश। हाँ जी हाँ देश। बिलकुल सही सुन रहे हैं आप। देश मे हम रहते हैं तो देश क्या किसी और के बाप का होगा...! और कान खोल के अच्छे से सुन समझ लीजिये देश केवल वही काम करेगा, जिसमे देश हो चाहे न हो, देशभक्ति की लौछेर जरूर होनी चाहिए। ये हवाएँ तो वैसे भी देशभक्त नही लगतीं। इधर तो देश पर संकट आया हुआ है और इनको मस्ती चढ़ी है। जो देशद्रोही नारे लगा रहे हैं, ये तो उनके भी गाल सहला के आ रही है। न कोई निंदा, न कोई विरोध, न कोई ऊंच नीच की समझ बस बसंती चोला पहन लिया और लगी नाचने। और नही तो सेक्यूलर टाइप फीलिंग भी दे रही है। पछुआं हवा को समझना पड़ेगा कि इस देश मे रहना है तो जरा ढंग से बहना है और मोदी मोदी तो हर हाल मे कहना है। ऐसे नही कि खेत खलिहान जहां चाहा घुस लिया। पेड़ बगइचा जिसे चाहा हिलाया डुलाया, आम के टिकोरों को झूला झुलाया और सारसो के खेत मे जा लोट रही। कोड ऑफ कंडक्ट तो इस पछुआं पवन पर भी लगाना पड़ेगा। पहले तो जब देश की सीमा मे घुसे तभी तुरंत वही के वही राजस्थान की रेत पर लिखकर बताना पड़ेगा कि वह देशभक्त है कि नही है। कोई घालमेल या चालाकी नही चलेगी। ये नही कि 'आपस मे प्रेम करो देशप्रेमियों' गाते बजाते बहे जा रही हैं। ये नही चलेगा। किसी देशप्रेमी को देशभक्त नही माना जा सकता। अगर नही लिखती और अपने ही मन के गीत गाये तो पक्का जानिए बसंती पवन की देशभक्ति संदिग्ध है और वो तो बस वहीं से पाकिस्तान लौट ले। मन की बात सुनाने और मन के गीत गुनगुनाने की छूट यहाँ अब सबको नही दी जा सकती, वो भी खुले आसमान मे। और ये जो हरियाली बिखेरती चलती है न तो पक्का इसके आसमानी किताब पढे होने का भ्रम भी होता है। आती भी उधर से ही है ईरान ईराक सबको छूती हुई। कोड ऑफ कंडक्ट ये कि...मोहे रंग दे गेरुआ ...गाते हुए पछुआं हवा आए तो मानें भी कि बसंत आया। और वो जो बसंत आए भी तो उसकी हवा को राष्ट्रीय सीमाओं मे, केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसरों मे कम से कम 207 फीट ऊपर से तो बहना ही होगा। अगर नही तो खड़ी रहे वहीं गेट पर आइडेंटिटी कार्ड लिए। वहाँ राजस्थान वाले पच्छिमी गेट पर भी अपनी ही सरकार है। महारानी माँ भी घुसने देने से तो रहीं देशद्रोही बसंत को।

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