Saturday, 19 March 2016

असहिष्णुता का नंगा प्रदर्शन

बसंत और फागुन का असर आज टूट रहा है। क्योंकि सत्ता ने अविवेक और असहिष्णुता का नंगा प्रदर्शन किया है। ....और इसे उसके लाभार्थी समर्थक अपनी सरकार की गुंडई मानते हैं। अगर सत्ता देश के एक विद्यार्थी की ज़िंदगी से खेलती दिखे तो उस समाज को बसंत मनाने का अधिकार कहाँ है...! पहले सरकार से जवाब तो मांगिए। कहाँ तो कन्हैया को देशद्रोही नारे लगाते हुए पूरी केंद्र सरकार ने देखा था। केंद्रीय गृह मंत्री से लेकर वित्त मंत्री तक, सरकार की पार्टी से लेकर, सरकार के माई बाप तक, दिल्ली पुलिस के सिपाही से लेकर वाहियात नौकरशाह बस्सी तक सबने देखा था। इन सभी के पास एक बहुप्रचारित वीडियो था जो यू ट्यूब पर भी उपलब्ध था, जिसमे कन्हैया देश को बर्बाद करने के नारे लगा रहा था। इन सभी के पास और भी कई सबूत थे। कुछ फोटोग्राफ़्स थे, कुछ पोस्टर थे, कुछ बैनर थे, जिन सबमे कन्हैया कहीं कश्मीर को तोड़ रहा था, कहीं देश को बाँट रहा था, कहीं संस्कृति की इज्जत उतार रहा था और कहीं जेएनयू मे पाकिस्तान बसा रहा था। लेकिन दुखद समाचार ये है कि जब न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने वह वीडियो और सारा घोषित साक्ष्य देखना चाहा तो सारे वीडियो सुग्गा हो गए और सारे सबूत कपूर हो गए। सरकार के इस जादुई पराक्रम के बाद कन्हैया को छः महीने की अन्तरिम जमानत दे दी गयी। यह मुकदमा अब इस विश्वास पर आगे चलेगा कि वो सारे झूठे सबूत जो आजतक नही जुटाये जा सके, उनको जुटाने, बनाने, गढ़ने की तरकीबें लगाई जाएंगी। जो नारे उसने कभी नही लगाए, उसका वीडियो और जो दुष्कृत्य उसने कभी नही किया, उसके फोटोग्राफ़्स तैयार करने के लिए फोटोशॉप मे माहिर 'देशभक्त' प्रतिभाशालियों के लिए रोजगार के अवसर सामने हैं।
देखते चलिये सत्ता और समाज दोनों पतन की ओर कितना अग्रसर हैं। हमलोग वह विश्वगुरु समाज हैं जिसने समाज के ऊपर सत्ता का प्रभामंडल स्वीकार किया है। न केवल स्वीकार किया है, बल्कि उसकी जकड़ मे भी गए हैं, लगभग समर्पण किया है। वो सारी सूक्ष्म कुप्रवृत्तियाँ जो सत्ता के बढ़ते प्रभाव या उसके नेतृत्व मे जीने के आदी समाज मे हो सकती हैं, वो सब अब भारतीय समाज मे दाखिल हो चुकी हैं। शो ऑफ...! नकली वैभव और अंतर का उतना ही खालीपन अपने समाज के 'विकास' करते हिस्से का गुणधर्म है। यह समाज बड़बोला हो गया है और दुर्योग से आज उसके हाथ मे सत्ता भी है। उसे अपराधबोध नही होता। यह गली के स्वार्थी श्वान की तरह व्यवहार करता है। जो किसी दूसरे तरह की भूँक भौंकने वाले को अपनी गली मे रहने ही नही देता, दूसरे को देख ही नही सकता ,वह अपनी गली का खुदमुख्तार सर कार्यवाह होता है। ये लोग जब टुच्चई कर रहे होते हैं, तब इन्हे गुंडई करने का संतोष होता है। इस गुंडा सरकार को खुद को सूली दे देनी चाहिए। चिदम्बरम जैसे पापी का पाप खोलकर ये सब अभी नाचने की तैयारी कर रहे थे कि अपनी ही गगरी फूट गयी। इसे कहते हैं सत्ता का धतकर्म। छीः एक लड़का जो केवल विरोधी विचार भर रखता है, उसकी ज़िंदगी लेने पर आ गए ये सब के सब...! विश्वास रखिए कन्हैया का यह मुकदमा सरकार के कुल ज़ोर लगाने के बाद भी अधिक नही चलेगा। क्योंकि यह मुकदमा लोक निगरानी मे लड़ा जाने वाला है और पीड़ित कन्हैया के खिलाफ सबूत नही हैं, यह दुनिया ने देख लिया। एक ताबूत बन रहा है, कन्हैया इस ताबूत मे मजबूत कील बनकर ठुंकेगा...!
जमानत मिलने के बाद कन्हैया की जान को खतरा बताया गया है इसलिए बुलेट प्रूफ सुरक्षा प्रबंध के साथ उसे अज्ञात स्थान पर ले जाया गया, ऐसा बताते हैं। इसका मतलब ये कि भाजपा और उसके समर्थकों से उत्पन्न खतरे से भाजपा की ही सरकार कन्हैया को सुरक्षा देगी। जो लोग इस प्रकरण से व्यथित हैं, उनसे निवेदन है कि इस प्रहसन को भी आक्रोश से देखिये और संतोष केवल इतना रखिए कि यह न्यायिक अभिरक्षा है। बाकी सरकार से कैफियत मांगिए, सभी मांगिए।

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