Saturday, 19 March 2016

औरत का मन

औरतों का मन ताड़िए साहब। तथागत बुद्ध की सारी तपस्या, ज्ञान और बोध उनके ठेंगे पर रहता है। आधी रात को सोयी हुई पत्नी और बच्चे को बिना कुछ कहे छोड़ गया तो पलायन किया। भाड़ मे जाय, ऐसी सिद्धि को आग लगे। जो एक औरत का नही हुआ, वो दुनिया का क्या होगा...! कृष्ण.....? वो तो छलिया है। एक छोड़ सबके संग रास रचाता है। चीर चुराता भी है, चीर बढ़ाता भी है। और सबसे बड़ी बात ये कि बांसुरी बजाता है। औरतों को ऐसा कान्हा बहुत भाता है, पर पति के रूप मे चुनना हो तो कानी आँख नही सुहाता है। ऐसे मे बम भोलाभण्डारी का ख्याल आता है। भंगेड़ी, नशेड़ी, औघड़, सांप, बिच्छू, मृगछाला, गाँजा, धतूरा यानी सब चलेगा पर पति वही चाहिए जो 108 जन्मों तक केवल पार्वती का हो गया हो। कृष्ण तो राधा का ही नही हुआ, रुक्मिणी, सत्यभामा तक का नही हुआ, महाभारत का होकर रह गया। ऐसे कृष्ण को मीराएं ही मिलती हैं। अब रह गए राम तो वो राजा अच्छे, बेटा अच्छे, भाई अच्छे, लेकिन पति तो बिलकुल नही अच्छे। उनसे अच्छा तो रावण है, मेघनाद है, राक्षस हैं लेकिन एक पत्नीव्रती, पूर्ण समर्पित। औरतों का मन ताड़िए साहब। अलबत्ता आजकल वामपंथी और दक्षिणपंथी दो तरह का बंटवारा औरतों मे भी है। पर मेरा जीवन अनुभव कहता है कि वो बस औरत होनी चाहिए- गरीब या अमीर फर्क नही पड़ता, अनपढ़ या सुशिक्षित फर्क नही पड़ता, काली या गोरी फर्क नही पड़ता, सुंदर- असुंदर फर्क नही पड़ता, ऊंचाई चाहे कम बेसी भी हो, पर मन के स्तर पर इन सबकी गहराई का तल एक ही होता है। smile emoticon

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