Saturday, 19 March 2016

आदमी की टक्कर का हैवान दूसरा कोई जानवर नही होता

इस दुनिया मे आदमी की टक्कर का हैवान दूसरा कोई जानवर नही होता। खूंखार होते हैं पर वहशी नही होते जानवर। सामान्य और पालतू पशुओं, जानवरों का व्यवहार हमलोग करीब से देखते हैं। याद कीजिये क्या कोई ऐसा जानवर याद आ रहा है, जिसे आपने अपनी मादाओं से वहशियाना सलूक करते देखा हो ...? गांवों, घरों मे हमलोग गायेँ, भैंसें पालते हैं और उनके प्राकृतिक सेक्स को करीब से देखते हैं। दस साल गाँव पर रहकर खेती की तो मैंने भी देखा है वे अपने प्राकृतिक नियमों से इंच भर भी परे नही जाते। नर पशु मादा पशु के हीट मे आने का इंतज़ार करता है और मालिक पशुपालक उसके हीट मे आने पर नज़र रखता है। पशुपालक सामान्य अवस्था और हीट अवस्था की स्थिति मे मादा पशु की आवाज़ मे आने वाले अंतर को स्पष्ट पहचानता है। अगर 24 घंटे के अंदर उसकी मुलाक़ात नर पशु से नही कराई गयी और हीट गुजर गया तो उसके बाद नर पशु उसे छूता ही नही, देख, सूंघ और समझकर हट जाता है और फिर एक, दो दिन नही, उसके पुनः हीट मे आने का इक्कीस दिन इंतज़ार करता है। ऐसा भी कभी नही देखा, सुना या पाया जाता कि एक मादा के ऊपर एक से ज्यादा नर पशु सवार हों। कुछ जानवर ऐसे जरूर होते हैं जहां एक मादा के कई हकदार होते हैं, तो भी वे मादा पर अधिकार के लिए आपस मे लड़ते हैं और जो बलशाली या विजेता होता है, वह मादा पर अधिकार पाता है। शेर तो हिंसक भी होता है, लेकिन अपने अकूत हिंसक बल का प्रयोग वह अपनी मादा पर नही, अपने प्रतिद्वंद्वियों पर करता है। निश्चित रूप से उसके पास बुद्धि नही होती, लेकिन इतनी समझ तो होती है कि उसकी मादा को उससे क्या चाहिए और उसका जैविक दायित्व क्या है। अब चूंकि आदमी के पास बुद्धि भी होती है इसलिए वह प्रकृति के नियमों और सहज प्रक्रियाओं को अपनी जेब मे रखकर चलता है। दुनिया के हर देश, हर समाज और हर कोने मे आदमी ने एक ऐसा सुरक्षित कोना बना रखा है जहां उसकी मादाएँ घसीटी जाती हैं, नोची जाती हैं, मांस-मांस काटी जाती हैं और इस सुरक्षित कोने मे दो, चार, दस, बीस किसी भी बड़ी से बड़ी संख्या मे आदमी पूरी भसड़ और दानवता के साथ मात्र एक अदद लिंग बना हुआ केवल एक औरत के ऊपर से विक्षिप्तों की तरह गुजरता है और शिकार स्त्री का मन कुचलता है सो तो गया भाड़ मे, टुकड़ा-टुकड़ा तन काटता है, स्तन भम्भोडता है, मुंह मे लिंग डालता है और योनि मे लोहा, पत्थर, गन्ना कुछ भी डालता है। इस तस्वीर को बड़ी करके देखिये....ग्वांटेनामो की सुरक्षित किलाबंद जेल दिखेगी, दिल्ली मुनीरका का बस स्टैंड दिखेगा, गन्ने के खेत मे कोई दलित बच्ची दिखेगी या किसी अस्पताल मे चालीस सालों से कोमा मे पड़ी एक मानव मादा दिखेगी। ........ सामने एक आईना रख लीजिये साहब, हम भी दिखेंगे, आप भी दिखेंगे। नही......कोई स्त्री स्त्री नही होती, हर आदमी की निगाह मे वह केवल और केवल एक योनि है बस...! और कोई मर्द मर्द भी नही होता, वह केवल एक काला, बदसूरत, बेशकल और बदबूदार लिंग होता है बस।

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